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UPSC Female Chairpersons:100 साल के इतिहास में UPSC को मिलीं सिर्फ 4 महिला अध्यक्ष, 3 की नियुक्ति 2014 के बाद; जानें इन टॉप IAS अफसरों के बारे में

UPSC Female Chairpersons:संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) देश का वह प्रतिष्ठित महकमा है, जिसके नाम से ही लाखों युवाओं के दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। हाल ही में यूपीएससी के शताब्दी वर्ष (100 Years) समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया।

पीएम मोदी ने बताया कि 1926 में स्थापित हुए इस आयोग के पूरे इतिहास में अब तक केवल 4 महिलाएं ही अध्यक्ष (Chairperson) के सर्वोच्च पद तक पहुंच पाई हैं। हालांकि, सकारात्मक बदलाव यह है कि इनमें से 3 महिला अध्यक्षों की नियुक्ति साल 2014 के बाद ही हुई है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर महिलाओं की भागीदारी अब तेजी से बढ़ रही है।

आजादी के बाद से यूपीएससी ने देश को अनगिनत आईएएस, आईपीएस अधिकारी दिए हैं। आइए जानते हैं यूपीएससी के इतिहास की उन 4 खास महिला अधिकारियों के बारे में, जिन्होंने अपनी कार्यशैली से एक अमिट छाप छोड़ी है।

1. रोज़ मिलियन बैथ्यू (Rose Millian Bathew): UPSC की पहली महिला अध्यक्ष

यूपीएससी के इतिहास में पहली बार किसी महिला को अध्यक्ष बनने का गौरव पूर्वोत्तर भारत (मेघालय) से ताल्लुक रखने वाली रोज़ मिलियन बैथ्यू (Rose Millian Bathew Kharbuli) को मिला था। उन्होंने 23 सितंबर 1992 से लेकर 23 अगस्त 1996 तक इस प्रतिष्ठित पद की कमान संभाली थी। लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन (LSR) से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन और दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल करने वाली रोज़ मिलियन का कार्यकाल उनकी निष्पक्षता और सख्त अनुशासन के लिए आज भी याद किया जाता है।

2. रजनी राजदान (Rajni Razdan): 2014 के बाद बदलाव की पहली वाहक

प्रधानमंत्री मोदी ने जिन तीन महिलाओं के 2014 के बाद नियुक्त होने का जिक्र किया, उनमें सबसे पहला नाम रजनी राजदान का आता है। 1973 बैच की हरियाणा कैडर की IAS अधिकारी रजनी राजदान ने 16 अगस्त 2014 को UPSC के अध्यक्ष पद की शपथ ली थी। इससे पहले वह 2008 से आयोग की सदस्य के रूप में काम कर रही थीं। उन्होंने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के सचिव के रूप में काम किया। एक बेहद ईमानदार अफसर की छवि वाली रजनी का कार्यकाल भले ही कुछ महीनों (नवंबर 2014 तक) का रहा, लेकिन उन्होंने महिला नेतृत्व की एक नई शुरुआत की।

3. अल्का सिरोही (Alka Sirohi): प्रशासनिक दक्षता की मिसाल

मध्य प्रदेश कैडर की 1974 बैच की आईएएस अधिकारी अल्का सिरोही भी इस आयोग की कमान संभाल चुकी हैं। सितंबर 2016 में उन्हें यूपीएससी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अपने दशकों लंबे प्रशासनिक सफर में अल्का सिरोही ने केंद्र और राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। उनकी कार्यशैली बेहद पारदर्शी मानी जाती थी। संघ लोक सेवा आयोग जैसी शीर्ष संस्था में उनकी नियुक्ति इस बात का प्रमाण थी कि शानदार अनुभव रखने वाली महिलाएं किसी भी सर्वोच्च पद को सुगमता से संभाल सकती हैं।

4. प्रीति सूदन (Preeti Sudan): कोविड काल की रणनीतिकार

हाल ही में साल 2024 में 1983 बैच की आईएएस अधिकारी प्रीति सूदन को यूपीएससी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वह आयोग की कमान संभालने वाली चौथी महिला हैं। हरियाणा से ताल्लुक रखने वाली प्रीति सूदन आंध्र प्रदेश कैडर की अधिकारी रही हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पढ़ाई की है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के रूप में उन्होंने कोविड-19 (Covid-19) महामारी के दौरान देश की स्वास्थ्य नीति में मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी फ्लैगशिप योजनाओं को जमीन पर उतारने में भी उनका अहम योगदान रहा है।

पिछले कुछ सालों के यूपीएससी परिणामों पर नजर डालें तो टॉप रैंक हासिल करने वाली लड़कियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। ऐसे में आयोग के सर्वोच्च पदों पर महिलाओं की यह मजबूत उपस्थिति आने वाली पीढ़ियों और सिविल सेवा की तैयारी कर रही लाखों बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन रही है।

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