Political News Hindi:वोटर लिस्ट से जुड़ी बड़ी खबर: चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 से हटाई ‘अतिरिक्त घोषणा’, जानें नाम कटने वालों और नए वोटर्स को क्या होगा फायदा

Political News Hindi:भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन ‘फॉर्म 6’ (Form 6) से एक अतिरिक्त घोषणा (Declaration) को हटा दिया है, जहां ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
सीधे शब्दों में कहें तो, SIR पूरा होने के बाद अब फॉर्म 6 भरने वाले लोगों से SIR से जुड़ी कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी। यह अहम बदलाव मंगलवार देर रात चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर किया गया, जिसकी आधिकारिक घोषणा 26 सितंबर को ही कर दी गई थी। हालांकि, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह घोषणा-पत्र फॉर्म में अब भी दिखाई दे रहा है।
5 आसान सवालों में समझें फॉर्म 6 में हुए इस बदलाव के मायने(Political News Hindi)
1. सवाल: मेरा नाम SIR प्रक्रिया के दौरान कट गया था। अब मुझे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए क्या साल 2003 की वोटर लिस्ट में माता-पिता का नाम बताना जरूरी होगा? जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां फॉर्म-6 से वह अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा लिया गया है। इसलिए अब नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आपको यह साबित करना जरूरी नहीं होगा कि आपका या आपके माता-पिता का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में दर्ज था या नहीं।
2. सवाल: तो क्या इसका मतलब है कि जिन लोगों के नाम SIR में कटे हैं, उनके नाम बिना किसी जांच-पड़ताल के वापस जुड़ जाएंगे? जवाब: नहीं, ऐसा नहीं होगा। घोषणा-पत्र हटने का मतलब जांच प्रक्रिया खत्म होना नहीं है। मतदाता बनने की आपकी पात्रता (Eligibility) की जांच और Form 6 की सामान्य वेरिफिकेशन प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी।
3. सवाल: जो युवा पहली बार वोटर बनने जा रहे हैं, उन्हें इस बदलाव से क्या फायदा होगा? जवाब: यह बदलाव नए वोटर्स के लिए बड़ी राहत है। अब उन्हें भी फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी का 2003 की वोटर लिस्ट से जुड़ा कोई विवरण नहीं देना होगा। इससे पहली बार वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया बेहद आसान और तेज हो जाएगी।
4. सवाल: फिर क्या 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी की अब कोई जरूरत ही नहीं रहेगी? जवाब: ऐसा नहीं है। चुनाव आयोग पुरानी वोटर लिस्ट का इस्तेमाल SIR की प्रक्रिया में रिकॉर्ड की जांच और मिलान के लिए कर सकता है। बस अब आम नागरिकों के लिए फॉर्म-6 भरते समय यह अतिरिक्त जानकारी देना जरूरी नहीं रह गया है।
5. सवाल: आखिर इस बदलाव का सबसे ज्यादा और सीधा फायदा किसे होगा? जवाब: इसका सीधा फायदा दोनों तरह के वोटर्स को होगा। जिनका नाम SIR में कट गया है और जो पहली बार अपना वोटर कार्ड बनवा रहे हैं। दोनों के लिए अतिरिक्त कागजी कार्रवाई कम हो गई है। खासकर नए वोटर्स को पुराने रिकॉर्ड खंगालने की परेशानी से मुक्ति मिल गई है।
रिपोर्ट: फॉर्म 6 में बदलाव पर 2 चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
द इंडियन एक्सप्रेस की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी जानकारी को सीधे जोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि बिना वैधानिक नियमों में बदलाव किए फॉर्म 6 में नया हिस्सा जोड़ना सही नहीं है। विवेक जोशी का कहना था कि फॉर्म 6 नियमों के तहत एक तय वैधानिक फॉर्म है, इसलिए इसमें कोई भी नया कॉलम जोड़ने से पहले नियमों में संशोधन होना चाहिए। वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने इस जोड़े गए हिस्से को “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए उसे तत्काल हटाने की बात कही थी।
हालांकि, बुधवार को चुनाव आयोग ने एक आधिकारिक बयान जारी कर चुनाव आयुक्तों में मतभेद से जुड़ी इन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति (Consensus) से ही लिए गए हैं।
16 राज्यों में चल रहा है SIR का तीसरा फेज
चुनाव आयोग ने 14 मई को दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और उत्तराखंड समेत कुल 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे फेज की घोषणा की थी। यह पूरी प्रक्रिया 30 मई से शुरू हुई थी और 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान लगभग 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इनमें से पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।






