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Chhattisgarh Monsoon Waterfalls: बारिश में घूमने लायक 8 शानदार जगहें

बारिश का मौसम शुरू होते ही Chhattisgarh Monsoon Waterfalls की तलाश में पर्यटकों की भीड़ बस्तर, कोरिया, गरियाबंद और कबीरधाम जैसे जिलों की तरफ बढ़ने लगती है। छत्तीसगढ़ को झरनों का राज्य कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि यहां हर जिले में कोई न कोई प्राकृतिक जलप्रपात मौजूद है जो मानसून में अपने पूरे रूप में निखर उठता है।

इस लेख में हम छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध झरनों की पूरी जानकारी, दूरी, रास्ता और यात्रा टिप्स के साथ बता रहे हैं ताकि आपकी अगली मानसून ट्रिप यादगार बन सके।

चित्रकोट जलप्रपात: भारत का नियाग्रा फॉल्स

बस्तर जिले में स्थित चित्रकोट जलप्रपात इंद्रावती नदी पर बना है और इसकी ऊंचाई करीब 95 फीट तथा चौड़ाई लगभग 985 फीट है। घोड़े की नाल जैसी आकृति और चौड़ाई की वजह से इसे भारत का नियाग्रा फॉल्स भी कहा जाता है। जगदलपुर से इसकी दूरी करीब 38 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

बारिश के मौसम में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से यह झरना अपने सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली रूप में दिखाई देता है। शाम के समय सूर्यास्त के दौरान यहां का नजारा फोटोग्राफी के लिहाज से बेहद खास माना जाता है।

तीरथगढ़ जलप्रपात: कांगेर घाटी की शान

Tirathgarh Waterfall

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात जगदलपुर से लगभग 36 किलोमीटर दूर है। यह झरना एक साथ कई छोटी-छोटी धाराओं में नीचे गिरता है, जिससे इसकी बनावट बेहद अनोखी और आकर्षक लगती है।

यहां तक पहुंचने के लिए घने जंगल से होकर करीब 6 किलोमीटर पैदल या वाहन से सफर तय करना पड़ता है। रास्ते में कांगेर घाटी की समृद्ध जैव विविधता भी देखने को मिलती है, जो इस यात्रा को और भी खास बनाती है।

मेंदरी घूमर जलप्रपात: घाटी की धुंध

चित्रकोट जाने वाले रास्ते में ही मेंदरी घूमर जलप्रपात स्थित है, जिसे स्थानीय भाषा में घाटी की धुंध भी कहा जाता है। यह झरना करीब 125 से 150 फीट की ऊंचाई से घने जंगल के बीच गिरता है।

चूंकि यह मौसमी झरना है, इसलिए इसे देखने का सबसे अच्छा समय बारिश के महीने ही हैं। यहां से घने वन क्षेत्र का नजारा देखकर पर्यटकों को गहरा सुकून मिलता है।

तामड़ा घूमर वाटरफॉल

जगदलपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित तामड़ा घूमर, बारिश के मौसम में अपनी असली खूबसूरती के साथ सामने आता है। अभी तक यह जगह बड़े पर्यटन केंद्रों जितनी भीड़भाड़ वाली नहीं बनी है, इसलिए शांति से समय बिताने वाले यात्रियों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है।

घने जंगल के बीच स्थित यह झरना प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों दोनों को पसंद आता है।

अमृतधारा जलप्रपात: कोरिया की पहचान

उत्तर छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में हसदेव नदी पर बना अमृतधारा जलप्रपात करीब 90 फीट ऊंचा है। यह मनेन्द्रगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर और चिरमिरी से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इस झरने के पास एक प्राचीन शिव मंदिर भी है, जहां हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर बड़ा मेला लगता है। स्थानीय मान्यता है कि यहां का पानी स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभदायक माना जाता है, जिस वजह से इसका नाम अमृतधारा पड़ा।

घटारानी-जतमई जलप्रपात: गरियाबंद का रत्न

रायपुर से करीब 85 किलोमीटर की दूरी पर गरियाबंद जिले में स्थित घटारानी-जतमई जलप्रपात राजधानी के सबसे नजदीक पड़ने वाले लोकप्रिय झरनों में से एक है। यहां जतमई माता का मंदिर भी है, जिस वजह से यह जगह धार्मिक और पर्यटन दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

रायपुर और आसपास के शहरों से एक दिन की ट्रिप के लिए यह जगह सबसे सुविधाजनक मानी जाती है, इसलिए वीकेंड पर यहां पर्यटकों की खासी भीड़ देखने को मिलती है।

रानी दहरा जलप्रपात: भोरमदेव की वादियों में

कबीरधाम जिला मुख्यालय से जबलपुर मार्ग पर करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रानी दहरा जलप्रपात भोरमदेव अभयारण्य के अंतर्गत आता है। मैकल पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा यह झरना करीब 90 फीट की ऊंचाई से गिरता है।

रियासत काल में यह स्थान राजपरिवार के लोगों का प्रिय मनोरंजन स्थल हुआ करता था। तीनों तरफ पहाड़ों से घिरा होने के कारण यहां का प्राकृतिक नजारा बेहद मनमोहक लगता है।

चर्रे-मर्रे जलप्रपात

कोरिया जिले के घने जंगलों में स्थित चर्रे-मर्रे जलप्रपात भी मानसून में देखने लायक जगहों में गिना जाता है। यह क्षेत्र अभी अपेक्षाकृत कम खोजा गया है, इसलिए यहां प्रकृति अपने सबसे कच्चे और असली रूप में नजर आती है।

जो पर्यटक भीड़भाड़ से दूर, शांत और ऑफबीट जगहों की तलाश में रहते हैं, उनके लिए यह झरना एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।

Chhattisgarh Monsoon Waterfalls देखने का सही समय

CG Waterfalls

Chhattisgarh Monsoon Waterfalls घूमने का सबसे उपयुक्त समय जुलाई से सितंबर के बीच होता है। इस दौरान नदियों और झरनों का जलस्तर सबसे अधिक रहता है, जिससे इनकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। अगस्त के महीने में बारिश अपने पूरे शबाब पर होती है, इसलिए यह महीना झरनों की यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

हालांकि यात्रा से पहले स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनी जरूर देख लेनी चाहिए, क्योंकि भारी बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है।

यात्रा के दौरान जरूरी सावधानियां

झरनों के आसपास की चट्टानें बारिश में काफी फिसलन भरी हो जाती हैं, इसलिए फिसलनरोधी जूते पहनना जरूरी है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को झरने के बिल्कुल किनारे न ले जाएं और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहाने से बचें।

स्थानीय प्रशासन या वन विभाग द्वारा लगाए गए चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड्स का पालन जरूर करें। इसके अलावा प्लास्टिक कचरा फैलाने से बचें और इन प्राकृतिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।

कैसे पहुंचें

राजधानी रायपुर से जगदलपुर, अंबिकापुर और कवर्धा जैसे शहरों तक सड़क और हवाई मार्ग दोनों की सुविधा उपलब्ध है। जगदलपुर पहुंचने के बाद टैक्सी, बाइक या स्थानीय बस के जरिए चित्रकोट, तीरथगढ़ और तामड़ा घूमर जैसे झरनों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

इसी तरह कोरिया जिले के अमृतधारा और कबीरधाम के रानी दहरा जलप्रपात तक पहुंचने के लिए स्थानीय बस सेवा और निजी वाहन दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। यात्रा की पूरी और ताजा जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में मौजूद ये सभी Chhattisgarh Monsoon Waterfalls न केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिहाज से बेहतरीन हैं, बल्कि इनमें से हर झरने की अपनी अलग सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी है। अगर आप इस मानसून में एक यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो बस्तर से लेकर कोरिया और कबीरधाम तक फैले इन झरनों को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें।

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