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चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी, दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी

नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं और चुनाव आयोग को इस पूरी प्रक्रिया को लेकर अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का रुख यह है कि मतदाता सूची को साफ-सुथरा और अद्यतन रखना चुनावी प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है।

दिल्ली में गुरुवार को प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा कड़ी कर दी गई। राजघाट और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने विरोध प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई।

SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

Special Intensive Revision यानी SIR इस पूरे राजनीतिक विवाद का केंद्र है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं की सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित या अपात्र लोगों के नाम हटाना होता है।

विपक्ष का सवाल यह है कि इस प्रक्रिया में यदि किसी वास्तविक मतदाता का नाम हट जाता है तो उसे वापस सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया कितनी आसान होगी। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती सीधे मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।

यही वजह है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे को केवल चुनावी प्रशासन का मामला नहीं मान रहे हैं। वे इसे लोकतांत्रिक अधिकार और मतदाता के अधिकार से जोड़कर देख रहे हैं।

राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

पिछले दिनों प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई विपक्षी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद कांग्रेस ने अपना आंदोलन और तेज करने का फैसला किया।

गुरुवार को भी विपक्षी नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। राजघाट पर प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई।

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनने से राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

विपक्ष का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन उसका लोकतांत्रिक अधिकार है। दूसरी तरफ प्रशासन का तर्क है कि संवेदनशील इलाकों में बड़े समूहों के जुटने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त की सुरक्षा बढ़ाई गई

विरोध प्रदर्शन के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। उन्हें पहले से Z-plus श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन नए सुरक्षा इनपुट के बाद उनके आवास के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल लगाए गए हैं।

केंद्र की ओर से दिल्ली में कानून-व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। इसका मकसद राजधानी के संवेदनशील इलाकों में किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है।

राजनीतिक तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में भी दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती रहेगी।

विपक्ष और सरकार आमने-सामने

इस पूरे विवाद ने संसद से बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ा दी है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को SIR से जुड़े सवालों का विस्तृत जवाब देना चाहिए। विपक्षी नेता यह भी मांग कर रहे हैं कि मतदाता सूची में हुए बदलावों से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं और किसी पात्र मतदाता का नाम हटने पर उसे आसानी से शिकायत करने का अवसर मिले।

दूसरी ओर, BJP विपक्ष के आंदोलन को राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रही है। सत्ता पक्ष का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण आवश्यक है।

आगे क्या हो सकता है?

अब बड़ा सवाल यह है कि यह राजनीतिक आंदोलन कितने समय तक चलता है। यदि विपक्ष अपने प्रदर्शन को देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाता है तो मामला और बड़ा हो सकता है।

दूसरी तरफ चुनाव आयोग के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण है। SIR से जुड़े नियमों, आंकड़ों और आपत्तियों की प्रक्रिया को जितना स्पष्ट किया जाएगा, राजनीतिक विवाद को उतना ही तथ्यात्मक आधार पर समझना आसान होगा।

इस विवाद का अंतिम असर आने वाले चुनावों और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल INDIA ब्लॉक ने आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।

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