Ambedkar Hospital Raipur: अंबेडकर अस्पताल की महिला डॉक्टरों ने 5 घंटे की जटिल सर्जरी कर बचाई प्रसूता की जान, 10 यूनिट खून चढ़ाकर दी नई जिंदगी

Ambedkar Hospital Raipur: नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर जब पूरे देश में देवी के 9 स्वरूपों की आराधना हो रही है, वहीं रायपुर के पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अंबेडकर अस्पताल में नारी शक्ति का एक जीवंत उदाहरण देखने को मिला है। यहां महिला चिकित्सकों की एक टीम ने अपने चिकित्सकीय कौशल और समर्पण से एक 32 वर्षीय प्रसूता को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। अत्यधिक रक्तस्राव और फटे हुए मूत्राशय व बच्चेदानी के साथ अस्पताल पहुंची इस महिला की 5 घंटे तक जटिल सर्जरी की गई और 10 यूनिट खून चढ़ाकर उसे नया जीवन दिया गया।
4थी गर्भावस्था में बिगड़ी स्थिति, पेट में ही हो गई थी शिशु की मौत(Ambedkar Hospital Raipur)
यह 32 वर्षीय महिला अपनी 4थी गर्भावस्था में थी। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां से उसे समीपस्थ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इसी दौरान प्रसव के प्रयास में महिला की बच्चेदानी और मूत्राशय बुरी तरह फट गए, जिससे गर्भस्थ शिशु की पेट के भीतर ही मृत्यु हो गई और महिला को भारी रक्तस्राव होने लगा। अत्यंत गंभीर स्थिति में उसे रायपुर के अंबेडकर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों के पास उसकी जान बचाने के लिए समय बहुत कम था।
5 घंटे तक चला ऑपरेशन, चढ़ा 10 यूनिट ब्लड
अस्पताल पहुंचते ही आपातकालीन सर्जरी की तैयारी की गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के नेतृत्व में डॉ. नीलम सिंह, डॉ. अर्पणा वर्मा और डॉ. नीति गोसाई की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम दिया।
- बच्चेदानी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण उसे निकालना पड़ा।
- सर्जरी विभाग की डॉ. प्राची के सहयोग से फटे हुए मूत्राशय की मरम्मत की गई।
- निश्चेतना विभाग से डॉ. अमृता की टीम ने मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- लगभग 5 घंटे तक चली इस सर्जरी के दौरान मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटकों (Blood and Blood Component Transfusion) का आधान किया गया।
2 दिनों तक वेंटिलेटर पर चला गहन उपचार
सर्जरी के बाद भी महिला की स्थिति नाजुक बनी हुई थी। उसे क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में डॉ. ओ. पी. सुंदरानी की टीम की देखरेख में 2 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। प्रसूति रोग, निश्चेतना, सर्जरी, ब्लड बैंक और नर्सिंग टीम के निरंतर समन्वय और निगरानी से महिला की स्थिति में सुधार हुआ और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई।
चिकित्सा जगत में मातृशक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण
पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस सफलता पर कहा कि प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की टीम द्वारा एक मां को नया जीवन देना मातृशक्ति के प्रति सच्चे सम्मान और सेवा भाव का प्रतीक है। अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज किसी परिवार की उम्मीद होता है। महिला चिकित्सकों ने इस नवरात्रि यह साबित कर दिया है कि शक्ति केवल आराधना में नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा में भी निहित है।






