Mirzapur The Movie Review: मुन्ना भैया और गुड्डू पंडित का जलवा बरकरार, लेकिन 3 घंटे 15 मिनट की कहानी ने किया बोर? पढ़ें रिव्यू

Mirzapur The Movie Review: ओटीटी (OTT) की दुनिया में अपना परचम लहराने और तहलका मचाने के बाद, ‘मिर्जापुर’ अब बड़े पर्दे पर आ चुकी है। कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया की भौकाल वाली दुनिया को सिनेमाघरों में देखने के लिए फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 3 घंटे 15 मिनट लंबी ‘मिर्जापुर द मूवी’ (Mirzapur The Movie) दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है?
अगर आपके मन में भी यही सवाल है कि सप्ताहांत पर यह फिल्म देखनी चाहिए या नहीं, तो आइए जानते हैं कैसी है ‘मिर्जापुर द मूवी’।
फिल्म की मुख्य बातें (Quick Overview)
- किरदार (Cast): पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi), अली फजल (Ali Fazal), दिव्येंदु (Divyenndu), जितेंद्र कुमार (Jitendra Kumar)
- नए चेहरे (New Entries): रवि किशन (Ravi Kishan), मोहित मलिक (Mohit Malik)
- रेटिंग (Rating): 3.5/5 स्टार्स (⭐⭐⭐✨)
फर्स्ट हाफ में धीमी कहानी और बेतुका गाना
फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी है और कहानी को अपनी असली रफ्तार पकड़ने में समय लगता है। यही वजह है कि पहला हाफ कई जगहों पर बोरिंग महसूस होता है। स्क्रीन पर वैसा रोमांच तुरंत पैदा नहीं होता, जिसकी ‘मिर्जापुर’ नाम से उम्मीद की जाती है। इस बीच फिल्म में एक रोमांटिक गाना आता है, जो सबसे ज्यादा निराश करता है। यह गाना कहानी के फ्लो को पूरी तरह तोड़ देता है और लगता है जैसे इसे जबरदस्ती फिल्म में ठूंसा गया हो। क्राइम-थ्रिलर (Crime Thriller) के डार्क माहौल में यह गाना बिल्कुल फिट नहीं बैठता। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है और नए किरदारों की एंट्री होती है, फिल्म में थोड़ी जान आती है।
रवि किशन और मोहित मलिक ने बढ़ाया ‘वॉओ फैक्टर’
फिल्म में रवि किशन (Ravi Kishan) की एंट्री एक अलग ऊर्जा लेकर आती है। पर्दे पर उनकी मौजूदगी बेहद दमदार है और वह अपने किरदार में पूरी तरह जमे हुए नजर आते हैं। वहीं, मोहित मलिक (Mohit Malik) का किरदार फिल्म के सबसे रहस्यमयी पहलुओं में से एक है। शुरुआत में ऐसा लगता है कि रवि किशन का किरदार कहानी पर हावी रहेगा, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म क्लाइमैक्स की ओर बढ़ती है, असली बाजी मोहित मलिक के किरदार के हाथ में नजर आती है।
जितेंद्र कुमार ने निभाया ‘बबलू पंडित’ का किरदार
मिर्जापुर सीरीज में ‘बबलू पंडित’ का लोकप्रिय किरदार विक्रांत मैसी (Vikrant Massey) ने निभाया था, जबकि फिल्म में यह जिम्मेदारी ‘पंचायत’ फेम जितेंद्र कुमार (Jitendra Kumar) के कंधों पर है। जितेंद्र ने इस किरदार को निभाने में अपना पूरा जोर लगाया है, लेकिन दर्शकों को विक्रांत मैसी और अली फजल की उस पुरानी केमिस्ट्री की याद जरूर आती है। बबलू पंडित के किरदार के साथ सीरीज में जो भावनात्मक जुड़ाव बना था, उसे दोबारा उसी स्तर पर महसूस कर पाना थोड़ा मुश्किल लगता है।
कहानी की टाइमलाइन (Timeline) बनी सबसे बड़ी उलझन
यह फिल्म सीरीज के पहले सीजन के बाद के दौर की कहानी दिखाती है। ऐसे में फिल्म की टाइमलाइन ही इसकी सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। चूंकि दर्शक ‘मिर्जापुर’ सीरीज (Mirzapur Series) के जरिए आगे की कहानी पहले ही देख चुके हैं, इसलिए प्रीक्वल (Prequel) के तौर पर दिखाई जा रही इस कहानी में सस्पेंस थोड़ा कम हो जाता है। जब दर्शकों को पहले से पता है कि आगे क्या होने वाला है, तो फिल्म के बड़े ट्विस्ट और सरप्राइज भी उतना गहरा असर नहीं छोड़ पाते।
मुन्ना भैया और गुड्डू पंडित का जबरदस्त स्वैग
इन सब कमियों के बावजूद, फिल्म में कुछ ऐसे पल हैं जिनके लिए ‘मिर्जापुर’ के कट्टर फैंस सिनेमाघर तक जरूर जाना चाहेंगे। जब-जब मुन्ना भैया (Munna Bhaiya) और गुड्डू पंडित (Guddu Pandit) पर्दे पर आते हैं, फिल्म का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दोनों की एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा की तरह शानदार है। इन्हें बड़े पर्दे पर एक्शन करते देखना फैंस के लिए एक पक्की विजुअल ट्रीट है।
सेकंड हाफ और दमदार बैकग्राउंड म्यूजिक
फर्स्ट हाफ की तुलना में सेकंड हाफ काफी बेहतर और कसा हुआ है। कहानी रफ्तार पकड़ती है और कई ऐसे ट्विस्ट आते हैं, जो धड़कनें बढ़ा देते हैं। क्लाइमैक्स (Climax) की तरफ बढ़ते हुए कहानी पहले हाफ की सुस्ती की काफी हद तक भरपाई कर देती है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर (BGM) इसकी एक और बड़ी ताकत है। म्यूजिक काफी दमदार और लाउड है, जो थ्रिल और एक्शन सीन्स के असर को कई गुना बढ़ा देता है।
3 घंटे 15 मिनट की लंबाई बनी सबसे बड़ा माइनस प्वाइंट
‘मिर्जापुर द मूवी’ की लंबाई करीब 3 घंटे 15 मिनट है, जो कई जगहों पर आपको थका देती है। यह महसूस होता है कि कहानी को एडिट करके थोड़ा छोटा और क्रिस्प किया जा सकता था। दर्शक कई बार घड़ी देखने पर मजबूर हो जाते हैं। अगर इसकी लंबाई थोड़ी कम होती, तो फिल्म का इम्पैक्ट कहीं ज्यादा तगड़ा होता।
देखें या नहीं? (Final Verdict)
कुल मिलाकर, ‘मिर्जापुर द मूवी’ में दमदार एक्टिंग, बेहतरीन बैकग्राउंड म्यूजिक और मुन्ना भैया-गुड्डू पंडित की मौजूदगी इसकी जान है। रवि किशन और मोहित मलिक फिल्म में नया रंग भरते हैं।
निर्णय: अगर आप ‘मिर्जापुर’ के पक्के फैन हैं और कालीन भैया, गुड्डू और मुन्ना को बड़े पर्दे पर भौकाल काटते देखने का इंतजार कर रहे थे, तो इसे एक बार जरूर देख सकते हैं। लेकिन अगर आप छोटी और तेज रफ्तार फिल्में पसंद करते हैं, तो 3 घंटे 15 मिनट की यह फिल्म आपको लंबी और खिंची हुई लग सकती है।






