IIT Bombay Sahil Wakode Case:IIT बॉम्बे सुसाइड केस: हॉस्टल्स से हटाए जा रहे सीलिंग फैन, 5वें दिन भी छात्रों का प्रदर्शन जारी; जानें CCTV फुटेज में क्या दिखा

IIT Bombay Sahil Wakode Case:IIT Bombay Sahil Wakode Case:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में बीटेक सेकंड ईयर के छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में तनाव का माहौल है। जहां एक तरफ छात्रों का प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी है, वहीं संस्थान प्रशासन ने आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हॉस्टल और कैंपस से सीलिंग फैन (छत वाले पंखे) हटाकर अब वॉल फैन (दीवार वाले पंखे) लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कैंपस में वॉल फैन पहुंचने की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पंखे बदलने पर चर्चा इसी साल जुलाई में एक अन्य छात्र की मौत के बाद शुरू हुई थी, लेकिन 18 सितंबर को साहिल की मौत के बाद इस फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
क्राइम ब्रांच की जांच: 18 सितंबर के CCTV फुटेज में क्या दिखा?(IIT Bombay Sahil Wakode Case)
22 वर्षीय साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला था और एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग का छात्र था। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने 18 सितंबर (घटना के दिन) की टाइमलाइन साझा की है:
- दोपहर 12:30 से 12:45 बजे: परीक्षा हॉल की CCTV फुटेज में साहिल अपनी जेब में रखी किसी चीज को देखने के लिए झुकता हुआ दिखाई दिया। इसके तुरंत बाद एक प्रोफेसर ने उससे सवाल किए और उसे अलग ले गए।
- दोपहर 1:25 बजे: क्राइम ब्रांच के अनुसार, साहिल लगभग 1:25 बजे हॉस्टल के अपने कमरे में पहुंचा।
- इसके बाद वह कमरे से बाहर नहीं निकला और बाद में उसी दिन वह मृत पाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल के CCTV फुटेज की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
परिवार का आरोप और IIT प्रशासन का यू-टर्न
साहिल के माता-पिता ने इस मामले में जाति आधारित उत्पीड़न और भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मामले की CBI जांच की मांग की है और SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। इस FIR में आरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का नाम भी शामिल है।
दूसरी तरफ, घटना के बाद IIT प्रशासन ने अपने बयानों को लेकर यू-टर्न लिया है। 19 सितंबर को IIT बॉम्बे ने बयान दिया था कि साहिल ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया था और चीटिंग करते पकड़े जाने के बाद उसने सुसाइड कर लिया। लेकिन 21 सितंबर को संस्थान ने माफी मांगते हुए अपना बयान वापस ले लिया और कहा कि जांच पूरी होने से पहले ऐसा बयान देना सही नहीं था।
IIT बॉम्बे में आमने-सामने छात्र और फैकल्टी फोरम
साहिल की मौत के बाद छात्रों और फैकल्टी के बीच विचारों का भारी टकराव देखने को मिल रहा है। (IIT दिल्ली और IIT मद्रास की फैकल्टी भी प्रोफेसर दूल्ला के बचाव में आगे आई है।)
छात्रों का पक्ष: क्या हैं उनकी मांगें?
- निष्पक्ष जांच: छात्र प्रोफेसर दूल्ला को पहले से दोषी नहीं मान रहे हैं, लेकिन वे पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच चाहते हैं।
- गलती को सही ठहराना मकसद नहीं: छात्रों ने साफ किया है कि उनका प्रदर्शन परीक्षा में ‘एकेडमिक मिसकंडक्ट’ को सही ठहराने के लिए नहीं है, बल्कि वे संस्थागत खामियों को उजागर कर रहे हैं।
- जवाबदेही और मेंटल हेल्थ: छात्र प्रशासन से जवाबदेही, पारदर्शिता और छात्र कल्याण (मेंटल हेल्थ) की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
फैकल्टी फोरम का पक्ष: प्रोफेसर का बचाव
- नियमों का पालन: IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार पंत के अनुसार, प्रोफेसर दूल्ला ने साहिल को गलत तरीके अपनाते हुए देखा और सिर्फ संस्थान के तय नियमों के मुताबिक कार्रवाई की।
- जांच से पहले निष्कर्ष नहीं: जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, सोशल मीडिया धारणाओं के आधार पर प्रोफेसर को दोषी मानना गलत है।
- SC/ST सेल की रिपोर्ट: फोरम का दावा है कि पिछले 3-4 महीनों में साहिल ने जातिगत टिप्पणियों को लेकर SC/ST सेल में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
- सिर्फ डीन पद से सस्पेंड: प्रोफेसर दूल्ला को सिर्फ ‘डीन, एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स’ के पद से हटाया गया है। वे अभी भी IIT बॉम्बे में टीचिंग फैकल्टी के सदस्य (प्रोफेसर) बने हुए हैं।
IITs में टूटते सपने: डराने वाले हैं सुसाइड के आंकड़े
भारत में 18,951 IIT सीटों के लिए हर साल 15 लाख से ज्यादा छात्र कड़ी मेहनत करते हैं। IIT में दाखिला किसी सपने के पूरे होने जैसा है। लेकिन साहिल की मौत ने इसके काले सच को उजागर कर दिया है। ‘ग्लोबल IIT एलुमिनाई सपोर्ट ग्रुप’ के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच विभिन्न IITs में कम से कम 65 छात्रों ने अपनी जान दी है। यह आंकड़े देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक दबाव और व्यवस्था की खामियों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।






