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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी: किसानों की सहूलियत के लिए नई व्यवस्थाओं पर जोर, जानें जमीनी हकीकत

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और यहां का सामाजिक ताना-बाना धान की फसल के इर्द-गिर्द बुना गया है। राज्य में समर्थन मूल्य पर होने वाली धान खरीदी केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा त्योहार है। आगामी धान खरीदी सीजन को लेकर राज्य शासन और प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर है कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की तकनीकी या व्यावहारिक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए खरीदी केंद्रों के बुनियादी ढांचे से लेकर सॉफ्टवेयर तक में कई अहम बदलाव किए जा रहे हैं।

खरीदी केंद्रों में सुविधाओं का जमीनी विस्तार

राज्य भर में संचालित सहकारी समितियों और धान खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले वर्षों के अनुभवों से सबक लेते हुए इस बार उन केंद्रों का चयन और अपग्रेडेशन किया जा रहा है जहां किसानों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ता था।

पेयजल और छाया की पुख्ता व्यवस्था

धान बेचने आने वाले किसानों को अक्सर केंद्रों में पूरा दिन और कई बार रात भी गुजारनी पड़ती है। प्रशासन ने सभी जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक खरीदी केंद्र में किसानों के लिए स्वच्छ पेयजल, छायादार शेड और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा, अचानक होने वाली बेमौसम बारिश से धान को बचाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम और तिरपाल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भौतिक सत्यापन का काम शुरू कर दिया गया है।

बारदाने की उपलब्धता और अग्रिम प्लानिंग

धान खरीदी में सबसे बड़ी चुनौती हमेशा बारदाने (जूट के बोरे) की समय पर उपलब्धता रही है। बारदाने की कमी के कारण खरीदी प्रभावित होती है और किसानों को अपनी बारी का लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए खाद्य विभाग ने जूट कमिश्नर के माध्यम से नए बारदानों की खेप मंगाने की प्रक्रिया काफी पहले शुरू कर दी है।

पीडीएस (PDS) दुकानों और राइस मिलर्स से भी पुराने बारदानों के एकत्रीकरण का काम तेजी से किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि खरीदी शुरू होने के पहले दिन ही सभी समितियों में कम से कम एक महीने की जरूरत का बारदाना एडवांस में डंप कर दिया जाए।

किसानों के पंजीयन और रकबे का तकनीकी सत्यापन

फर्जी तरीके से धान बेचने और बिचौलियों को रोकने के लिए राजस्व विभाग और कृषि विभाग संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। किसानों के नए पंजीयन और पुराने रकबे के सत्यापन का काम भुइयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप में किया जा रहा है।

गिरदावरी और सेटेलाइट मैपिंग

पटवारियों के माध्यम से होने वाली गिरदावरी (फसल का भौतिक सत्यापन) को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इस बार तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। कई जिलों में सेटेलाइट इमेजिंग और जीपीएस तकनीक के जरिए रकबे का मिलान किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि समर्थन मूल्य का लाभ केवल राज्य के वास्तविक किसानों को ही मिले। सीमावर्ती जिलों में विशेष चौकसी बरती जा रही है जिससे पड़ोसी राज्यों का धान अवैध रूप से छत्तीसगढ़ के बाजार में न खप सके।

टोकन व्यवस्था में सुधार और कस्टम मिलिंग

किसानों को धान बेचने के लिए टोकन प्राप्त करने में होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को सर्वर के स्तर पर और मजबूत किया गया है। अब किसान घर बैठे अपने मोबाइल से अपनी सुविधानुसार धान बेचने की तारीख तय कर सकते हैं। इससे समितियों में लगने वाली अनावश्यक भीड़ में कमी आई है।

धान के उठाव और कस्टम मिलिंग की नीति को भी व्यावहारिक बनाया गया है। मिलर्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी के साथ-साथ धान का उठाव भी जारी रहना चाहिए ताकि केंद्रों में जाम की स्थिति न बने और खरीदी निर्बाध रूप से चलती रहे। प्रशासन की इन तमाम तैयारियों से यह स्पष्ट है कि इस बार का धान खरीदी सीजन किसानों के लिए अधिक सुगम और लाभप्रद साबित होगा।

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