कस्टम मिलिंग केस में ED की जांच का नया चरण, नोटशीट से लेकर प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की प्रक्रिया तक पड़ताल

छत्तीसगढ़ के कस्टम राइस मिलिंग प्रोत्साहन राशि मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच फिर चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार खाद्य विभाग की ओर से जांच एजेंसी को प्रोत्साहन राशि बढ़ाए जाने की प्रक्रिया से जुड़े सैकड़ों पन्नों के रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए हैं। जांच में अब यह देखा जा रहा है कि ₹40 प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि को ₹120 प्रति क्विंटल करने की प्रशासनिक प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी, किन स्तरों पर प्रस्ताव और अनुमोदन हुए तथा उसके बाद भुगतान व्यवस्था कैसे संचालित हुई।
Chhattisgarh Custom Milling Scam में नया क्या है?
आज की रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य विभाग द्वारा ED को नोटशीट, प्रस्ताव, संबंधित पत्राचार, बैठकों और प्रोत्साहन राशि में बदलाव की प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड दिए गए हैं। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के जरिए यह समझने का प्रयास कर रही है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया किस क्रम में आगे बढ़ी।
इस केस की पृष्ठभूमि नई नहीं है। ED ने अक्टूबर 2023 के आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा था कि कस्टम मिलिंग के लिए विशेष प्रोत्साहन ₹40 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹120 प्रति क्विंटल किया गया था। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि बाद में मिलर्स से कथित तौर पर प्रति किस्त ₹20 प्रति क्विंटल की दर से रकम वसूले जाने की व्यवस्था विकसित हुई। उस समय ED ने तलाशी अभियान और दस्तावेजों की जब्ती की जानकारी भी सार्वजनिक की थी।
ED की पुरानी कार्रवाई क्या कहती है?
मई 2024 में ED ने MARKFED के तत्कालीन एमडी मनोज सोनी की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए अपने प्रेस रिलीज में कथित किकबैक सिस्टम का विवरण दिया था। एजेंसी ने उस चरण की जांच के आधार पर ₹100 करोड़ से अधिक कथित किकबैक उत्पन्न होने की बात कही थी। इसके बाद राइस मिलर्स एसोसिएशन से जुड़े रोशन चंद्राकर की गिरफ्तारी की सूचना भी ED ने जारी की थी।
अक्टूबर 2024 के एक अन्य आधिकारिक प्रेस रिलीज में ED ने बताया था कि विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई और अदालत ने उस पर संज्ञान लिया। उसी दस्तावेज में करीब ₹19 करोड़ की संपत्ति के अस्थायी अटैचमेंट की जानकारी भी दी गई थी। ये एजेंसी के आरोप और जांच निष्कर्ष हैं; अंतिम आपराधिक दायित्व अदालत की प्रक्रिया से तय होता है।
अलग-अलग रकम क्यों दिखाई देती है?
इस मामले की रिपोर्टिंग में अलग-अलग चरणों पर अलग रकम सामने आई है। आज की प्रकाशित रिपोर्ट मामले को करीब ₹140 करोड़ के संदर्भ में बताती है, जबकि ED के अक्टूबर 2023 के प्रेस रिलीज में उस समय जांच के आधार पर ₹175 करोड़ तक कथित किकबैक का उल्लेख था। मई 2024 के रिलीज में ₹100 करोड़ से अधिक का आंकड़ा दर्ज किया गया। इसलिए इन आंकड़ों को एक ही अंतिम, न्यायिक रूप से स्थापित राशि के रूप में पढ़ना उचित नहीं होगा। वे अलग जांच चरणों में एजेंसी द्वारा बताए गए अनुमान और आरोप हैं।
अब दस्तावेजों पर फोकस क्यों?
किसी सरकारी प्रोत्साहन की राशि बदलने में प्रस्ताव, नोटशीट, वित्तीय स्वीकृति, विभागीय अनुमोदन और अधिसूचना जैसे कई चरण हो सकते हैं। इसलिए जांच के लिए पूरी फाइल की समयरेखा महत्वपूर्ण होती है। किस तारीख पर प्रस्ताव आया, किसने टिप्पणी की, किस आधार पर दर बदली गई और बाद में भुगतान किस प्रक्रिया से हुआ, इन प्रश्नों का जवाब दस्तावेजों से ही निकल सकता है।






