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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा झटका: पुलिस आरक्षकों के प्रमोशन की अंतिम सूची जारी करने पर लगाई रोक

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने पुलिस आरक्षकों से प्रधान आरक्षक के पद पर होने वाले प्रमोशन (Police Constable Promotions) को लेकर एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने इस पदोन्नति प्रक्रिया की अंतिम सूची जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है।

क्या है हाई कोर्ट का आदेश?

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग अपनी विभागीय पदोन्नति समिति की मूल्यांकन प्रक्रिया को जारी रख सकता है, लेकिन हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और अनुमति के बिना किसी भी आरक्षक का अंतिम प्रमोशन ऑर्डर जारी नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि पुलिस विभाग आगामी 1 जून 2026 को प्रमोशन की फाइनल लिस्ट जारी करने की तैयारी में था।

73 आरक्षकों ने दायर की है याचिका

कोरबा जिले समेत विभिन्न थानों में पदस्थ लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य सहित कुल 73 आरक्षकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं ने राज्य शासन, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), आईजी बिलासपुर रेंज और एसपी कोरबा को मामले में पक्षकार बनाया है।

विवाद की असली जड़: नियम 2007 का उल्लंघन

याचिका में ‘छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कांस्टेबल भर्ती, पदोन्नति, सेवा शर्त नियम 2007’ का हवाला दिया गया है।

  • क्या है नियम: नियमों के मुताबिक, यदि कोई भी पुलिस कर्मचारी अपनी मर्जी से एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो नए जिले की वरिष्ठता (Seniority) सूची में उसका नाम सबसे नीचे दर्ज किया जाना चाहिए।
  • क्या है आरोप: आरक्षकों का आरोप है कि पुलिस मुख्यालय (PHQ) वर्तमान प्रमोशन प्रक्रिया में उन कर्मचारियों को भी उनकी शुरुआती नियुक्ति तिथि के आधार पर सीनियर मानकर प्रमोशन दे रहा है, जिन्होंने खुद अपनी मर्जी से जिला बदला था। इससे सालों से एक ही जिले में निष्ठा से काम कर रहे जवानों का हक मारा जा रहा है।

राज्य सरकार का तर्क

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को याचिका में चुनौती नहीं दी गई है। साथ ही दावा किया गया कि याचिका दायर करने वाले कई आरक्षकों के नाम भी फाइनल फिट लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रथम दृष्टया इसे सेवा नियमों का उल्लंघन मानते हुए अंतिम सूची जारी करने पर रोक लगा दी है।

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