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PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गृहयुद्ध जैसे हालात, JAAC पर बैन के बाद भारी हिंसा, 11 की मौत

PoK Protests JAAC banपाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं। नागरिक समाज गठबंधन ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) पर पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में अशांति और तनाव फैल गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में बुलाए गए पूर्ण बंद से पहले रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के बीच भीषण हिंसक झड़प हुई है। इस खूनी संघर्ष में अब तक कम से कम 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 70 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

गोलीबारी के बाद बढ़ा गुस्सा, आज पूर्ण ‘शटर-डाउन’

क्षेत्र में हिंसा उस वक्त चरम पर पहुंच गई जब JAAC के समर्थक रावलकोट के एक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर भारी संख्या में इकट्ठा हुए थे। वहां इससे पहले हुई एक गोलीबारी में मारे गए नागरिक अधिकार कार्यकर्ता का शव रखा गया था। शव को देखकर प्रदर्शनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा और वे सुरक्षाबलों से भिड़ गए। तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने मंगलवार को पूरे पीओके में पूर्ण रूप से ‘शटर-डाउन’ और चक्का जाम हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे बड़े पैमाने पर दोबारा हिंसा भड़कने की आशंका है। आपको बता दें कि प्रशासन ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत पिछले हफ्ते ही JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था।

‘लॉन्ग मार्च’ को रोकने के लिए प्रशासन की बड़ी घेराबंदी

अपनी शुरुआती योजना के तहत, JAAC ने पूरे क्षेत्र में बड़े आंदोलन की तैयारी की है:

  • लॉन्ग मार्च का रूट: प्रदर्शनकारियों ने सबसे दक्षिणी जिले भिंबर से एक विशाल ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू करने का ऐलान किया है। यह मार्च मीरपुर, कोटली और पुंछ से होते हुए 10 जून को मुजफ्फराबाद पहुंचेगा, जहां लेजिस्लेटिव असेंबली (विधानसभा) के बाहर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।
  • 200 से अधिक लोग हिरासत में: पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मार्च को रोकने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर इस मार्च को मुजफ्फराबाद में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। सुरक्षाबलों ने कार्रवाई करते हुए अब तक पूरे इलाके से 200 से अधिक सक्रिय कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया है। हालांकि, संगठन के कई शीर्ष नेता इस समय भूमिगत हो गए हैं।

रावलकोट में ‘गुरिल्ला युद्ध’ की तर्ज पर हमला

पुंछ सेक्टर के डिविजनल कमिश्नर सरदार वहीद खान के मुताबिक, रविवार आधी रात को रावलकोट में प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए सुरक्षाबलों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। उपद्रवियों ने पूरी प्लानिंग के साथ कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) का रास्ता रोक दिया था और लगभग पूरे अस्पताल परिसर को अपने कब्जे में ले लिया था, जिसके चलते डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।

कमिश्नर ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के पास लंबी दूरी तक मार करने वाले आधुनिक हथियार, पेट्रोल बम और भारी मात्रा में गोला-बारूद मौजूद था। उन्होंने तंग गलियों और छिपने वाली जगहों का इस्तेमाल कर बिल्कुल ‘गुरिल्ला युद्ध’ की तर्ज पर सुरक्षाकर्मियों पर घातक हमले किए।

आधिकारिक आंकड़ों पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस हिंसा में 4 पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की उपद्रवियों की गोली

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