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Women’s Asia Cup: चैंपियन भारत ने ACC चेयरमैन मोहसिन नकवी से नहीं ली ट्रॉफी, जानें क्या है पूरा विवाद और ‘ट्रॉफी चोर 2.0’ की कहानी

Women’s Asia Cup: भारतीय महिला क्रिकेट टीम (Indian Women’s Cricket Team) ने वुमेंस एशिया कप 2026 (Women’s Asia Cup 2026) का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। लेकिन, खिताबी जीत के बाद मैदान पर एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जिसकी चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है।

एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी (Mohsin Naqvi) भारतीय टीम को ट्रॉफी देने के लिए मंच पर पहुंचे थे, लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) और पूरी भारतीय टीम ने उनसे ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया। काफी देर तक मंच पर असहज स्थिति में खड़े रहने के बाद नकवी को बिना ट्रॉफी दिए ही वापस लौटना पड़ा।

खबर की मुख्य बातें (Women’s Asia Cup)

  • भारत का कड़ा रुख: चैंपियन बनने के बावजूद टीम इंडिया ने मोहसिन नकवी के हाथों से नहीं ली एशिया कप की ट्रॉफी।
  • क्या है वजह: मोहसिन नकवी पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं और भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए जाने जाते हैं।
  • ट्रॉफी चोर 2.0: पिछले साल पुरुष टीम के साथ भी हुआ था ऐसा ही वाकया, फैंस ने नकवी को दिया नया नाम।
  • BCCI की अपील: बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने किसी और से ट्रॉफी दिलवाने की अपील की थी, जिसे नकवी ने अनसुना कर दिया।

भारतीय टीम ने क्यों नहीं ली मोहसिन नकवी से ट्रॉफी?

मोहसिन नकवी केवल ACC के चेयरमैन नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चीफ और वर्तमान में पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं। भारतीय खिलाड़ियों का नकवी से ट्रॉफी न लेने का मुख्य कारण उनका राजनीतिक पद और भारत के खिलाफ लगातार नफरत भरे बयान देना है। अगर मंच पर नकवी की जगह कोई अन्य अधिकारी, मेजबान बोर्ड का सदस्य या श्रीलंका बोर्ड का कोई पदाधिकारी होता, तो भारतीय टीम सहर्ष ट्रॉफी स्वीकार कर लेती।

BCCI की अपील ठुकराई, फैंस ने नाम रखा ‘ट्रॉफी चोर 2.0’

यह कोई पहला मौका नहीं है जब ऐसा विवाद हुआ हो। पिछले साल जब भारतीय पुरुष टीम (सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में) ने एशिया कप जीता था, तब भी उन्होंने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। उस वक्त भी नकवी ट्रॉफी लेकर चले गए थे, जिसके बाद भारतीय फैंस ने उन्हें ‘ट्रॉफी चोर’ का टैग दिया था। अब महिला टीम के साथ भी यही वाकया दोहराए जाने पर फैंस उन्हें सोशल मीडिया पर ‘ट्रॉफी चोर 2.0’ (Trophy Chor 2.0) कह रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद से बचने के लिए BCCI के सचिव देवजीत सैकिया ने ACC से अपील की थी कि नकवी के बजाय किसी अन्य अधिकारी से ट्रॉफी दिलवाई जाए, लेकिन नकवी इसके लिए तैयार नहीं हुए।

बेइज्जती तय थी, फिर भी मंच पर क्यों गए नकवी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मोहसिन नकवी को पता था कि भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी नहीं लेगी और मंच पर उनकी फजीहत होगी, तो वह जानबूझकर ट्रॉफी देने क्यों गए?

इसके पीछे की मुख्य वजह पाकिस्तान क्रिकेट की घरेलू राजनीति और वहां की अवाम का गुस्सा माना जा रहा है:

  • पाकिस्तान में हो रही थी फजीहत: वर्तमान में विश्व क्रिकेट में पाकिस्तान टीम की हालत बेहद खराब है। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के बीच से ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने 7 खिलाड़ियों और 2 कोचों को वापस बुला लिया था।
  • खराब टीम सिलेक्शन: आखिरी मैच में एक ऐसे ओपनर को भेजा गया जिसने एक साल से रेड बॉल क्रिकेट नहीं खेला था, और वह बिना खाता खोले आउट हो गया।
  • ध्यान भटकाने की कोशिश: पीसीबी चीफ के तौर पर नकवी की पाकिस्तान में जमकर आलोचना हो रही थी। अपनी घरेलू अवाम का ध्यान अपनी नाकामियों से भटकाने और खुद को सुर्खियों में लाने के लिए ही नकवी फाइनल से ठीक पहले दुबई पहुंचे और इस ‘ट्रॉफी ड्रामे’ को जन्म दिया।

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