Lok Sabha NDA Majority: TMC-शिवसेना में टूट से NDA मजबूत, जानिए 360 के जादुई (दो-तिहाई) आंकड़े तक कैसे पहुंचेगी सरकार?

Political News (New Delhi): संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत (Lok Sabha NDA Majority) की जरूरत होती है। अगर मौजूदा 540 सांसद उपस्थित होते हैं और वोट देते हैं, तो यह जादुई आंकड़ा 360 मतों का होता है।
हाल ही में विपक्षी दलों में हुई बड़ी टूट के बाद लोकसभा के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। एनडीए (NDA) का कुनबा बढ़ा है, जबकि INDIA गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एनडीए दो-तिहाई बहुमत के कितने करीब है।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- NDA का बढ़ा कुनबा: टीएमसी (TMC) और शिवसेना (UBT) के 26 सांसदों की टूट के बाद NDA का आंकड़ा 319 तक पहुंच गया है।
- विपक्ष को दोहरा झटका: INDIA गठबंधन 225 से गिरकर 199 पर आ गया है, वहीं DMK ने भी गठबंधन से दूरी बना ली है।
- अप्रैल बिल का गणित: अप्रैल में जब संविधान संशोधन बिल आया था, तब 548 ने वोट डाले थे। टारगेट घटकर 352 हो गया था, लेकिन NDA को 298 वोट ही मिले थे।
- वोटिंग से दूरी बनेगी गेमचेंजर: अगर कुछ विपक्षी दल वोटिंग का बायकॉट करते हैं, तो NDA के लिए बहुमत का आंकड़ा आसान हो जाएगा।
दल टूटने के बाद NDA के नंबर कहां पहुंचे?
हाल ही में विपक्ष के दो बड़े दलों में फूट पड़ी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों ने ‘नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ के साथ विलय कर लिया है। यह नया दल अब एनडीए को समर्थन दे रहा है और सदन में अलग बैठने का अनुरोध किया है।
वहीं, शिवसेना (UBT) गुट के 6 सांसदों ने NDA में शामिल एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ हाथ मिला लिया है। इस बड़ी टूट के चलते एनडीए गठबंधन का कुल आंकड़ा 319 पर पहुंच गया है। हालांकि, सरकार अभी भी 360 के दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से 41 कदम दूर है।
INDIA गठबंधन की ताकत घटी, 199 पर सिमटा विपक्ष
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद 225 सांसदों के साथ मजबूत दिख रहे INDIA गठबंधन को हालिया टूट से बड़ा झटका लगा है। 26 सांसदों के छिटकने के बाद विपक्ष का आंकड़ा अब 199 पर आ गया है।
इसके अलावा, 22 सांसदों वाली तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) ने भी खुद को इस गठबंधन से दूर कर लिया है। दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और डीएमके में दूरियां बढ़ गई हैं।
- INDIA में पार्टियों की स्थिति: गठबंधन में अब सबसे बड़ा दल 98 सांसदों के साथ कांग्रेस है। दूसरे नंबर पर 37 सांसदों के साथ समाजवादी पार्टी (SP) है। टूट से पहले टीएमसी तीसरे और शिवसेना यूबीटी चौथे नंबर पर थी, लेकिन अब पूरे समीकरण बदल गए हैं।
आसान भाषा में समझें: NDA कैसे पा सकता है दो-तिहाई बहुमत?
Lok Sabha NDA Majority के जादुई आंकड़े को छूने के लिए अब निर्दलीय और कुछ क्षेत्रीय दलों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
- निर्दलीय और YSRCP: 5 निर्दलीय सांसद अहम हैं (अमृतपाल सिंह और शेख अब्दुल रशीद अभी जेल में हैं)। अगर एनडीए को 4 सांसदों वाली जगन मोहन रेड्डी की YSRCP का समर्थन मिलता है, तो सरकार को 9 अतिरिक्त वोट मिल जाएंगे।
- बायकाट/वॉकआउट से फायदा: शरद पवार गुट (NCP-SP) के पास 8 और DMK के पास 22 सांसद हैं। यदि किसी बिल पर वोटिंग के दौरान ये दोनों दल (कुल 30 सांसद) अनुपस्थित रहते हैं या वॉकआउट करते हैं, तो सदन की प्रभावी संख्या कम हो जाएगी और दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 330 पर आ जाएगा।
- फिर भी 2 वोट की कमी: एनडीए के 319 और (निर्दलीय+YSRCP) के 9 वोट मिलाकर कुल 328 वोट होते हैं। यानी अगर विपक्ष के 30 सांसद वॉकआउट भी कर दें, तब भी एनडीए को जादुई आंकड़े (330) तक पहुंचने के लिए 2 और मतों की दरकार होगी।
कुल मिलाकर, आने वाले समय में सदन के अंदर छोटे दलों का रुख ही यह तय करेगा कि सरकार कोई बड़ा संविधान संशोधन आसानी से पास करा पाती है या नहीं।






