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Share Market Crash:शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,045 अंक भरभराया, निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर; एक दिन में डूबे ₹11 लाख करोड़

Share Market Crash:भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को दलाल स्ट्रीट पर भयंकर बिकवाली देखने को मिली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े रुख, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की रिकॉर्ड बिकवाली और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते बाजार पूरी तरह धराशायी हो गया।

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1.5% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन एक ही झटके में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये घट गया, जिससे निवेशकों को भारी चपत लगी है।

बाजार का क्लोजिंग स्टेटस: नए 52-वीक लो पर निफ्टी(Share Market Crash)

कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि निफ्टी 50 गिरकर 22,179 के नए 52-सप्ताह के निचले स्तर तक चला गया था, जबकि सेंसेक्स 1,200 अंक से ज्यादा फिसलकर 71,400 के स्तर से नीचे पहुंच गया था।

  • सेंसेक्स (BSE Sensex): 1,045.46 अंक (-1.44%) की भारी गिरावट के साथ 71,593.24 पर बंद हुआ।
  • निफ्टी (NSE Nifty): 371.25 अंक (-1.64%) टूटकर 22,231.80 के स्तर पर बंद हुआ।

शेयर बाजार में ‘ब्लडबाथ’ के 5 सबसे बड़े कारण

1. RBI की सख्त मॉनेटरी पॉलिसी और ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’

आरबीआई द्वारा लगभग चार वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी करने और अपने नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (Calibrated Tightening) करने के फैसले ने बाजार की धारणा को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) का अनुमान है कि इस चालू चक्र में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 100 बेसिस पॉइंट (1%) तक की और बढ़ोतरी कर सकता है।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (US Bond Yield) में तेज उछाल

वैश्विक बॉन्ड बाजारों में मचे घमासान के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है:

  • 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड: 5.71% के पार
  • 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड: 5.3% के ऊपर
  • 2-वर्षीय बॉन्ड यील्ड: 4.9% के करीब बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सुरक्षित रिटर्न की तलाश में निवेशक इक्विटी (शेयर बाजार) से पैसा निकालकर डेट और बॉन्ड मार्केट में शिफ्ट करने लगते हैं, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव बनता है।

3. FII की ताबड़तोड़ बिकवाली: 9 दिनों में ₹57,000 करोड़ निकाले

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय इक्विटी बेच रहे हैं।

  • अकेले बुधवार को FIIs ने 6,121 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे।
  • बीते लगातार नौ कारोबारी सत्रों में FII भारतीय बाजार से करीब 57,000 करोड़ रुपये की पूंजी निकाल चुके हैं।
  • सितंबर माह से अब तक के 25 सत्रों में से 20 सत्रों में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल (Net Sellers) रहे हैं।

4. ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में भू-राजनीतिक तनाव और जहाजों पर बढ़ते हमलों के चलते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल (Brent Crude) 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, लिहाजा महंगा तेल सीधे तौर पर देश में महंगाई और कंपनियों की इनपुट कॉस्ट को बढ़ाता है।

5. अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की ब्याज दरों का डर

ग्लोबल स्तर पर महंगाई के दबाव को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका गहरा गई है। सीएमई फेडवॉच (CME FedWatch) के आंकड़ों के मुताबिक, भले ही इस महीने दर वृद्धि की संभावना सिर्फ 18% है, लेकिन दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की आशंका 80% तक पहुंच चुकी है, जिसने वैश्विक बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है।

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