N Chandrasekaran Resigns: टाटा ग्रुप में मची उथल-पुथल, एन. चंद्रशेखरन ने चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा; 4% तक गिरे शेयर

N Chandrasekaran Resigns: देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूह टाटा ग्रुप (Tata Group) के मैनेजमेंट में एक बड़ा और अचानक बदलाव हुआ है। एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) ने टाटा संस (Tata Sons) के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। इस चौंकाने वाले फैसले के साथ ही टाटा ग्रुप के शीर्ष पर उनका लगभग एक दशक (10 साल) लंबा शानदार कार्यकाल अचानक खत्म होने जा रहा है।
इस बड़ी खबर के बाजार में आते ही शेयर बाजार (Stock Market) में टाटा ग्रुप की कंपनियों पर नकारात्मक असर देखा गया। TCS (Tata Consultancy Services) समेत टाटा की कई अन्य कंपनियों के शेयरों में 4% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- बड़ा इस्तीफा: एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा।
- कब तक रहेंगे पद पर: वे फरवरी 2027 में अपना आधिकारिक कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे।
- बाजार पर असर: खबर आते ही TCS समेत टाटा ग्रुप के कई शेयरों में 4% तक की गिरावट।
- क्या है विवाद की जड़?: नोएल टाटा (Noel Tata) और अन्य ट्रस्टियों के बीच कंपनी की रणनीतियों को लेकर मतभेद।
एजीएम (AGM) से ठीक पहले क्यों लिया गया फैसला?
ईटी (Economic Times) की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि 63 वर्षीय चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। चंद्रशेखरन का यह अहम फैसला 18 अगस्त को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) से ठीक पहले आया है।
वर्तमान में टाटा संस में लगभग 66% की बड़ी हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की है। हाल के दिनों में ट्रस्ट की वोटिंग प्रक्रिया और कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (Listed) कराने को लेकर अंदरूनी मतभेद चल रहे हैं। माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के मौजूदा चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata), चंद्रशेखरन को अगला कार्यकाल दिए जाने के खिलाफ थे।
अपने इस्तीफे पर क्या बोले एन. चंद्रशेखरन?
बुधवार को अपने इस्तीफे पर जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा: “सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने मेरे अगले कार्यकाल को 5 साल के लिए बढ़ाने का सर्वसम्मति से फैसला और सिफारिश की थी। इसके बाद टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमिटी और बोर्ड ने भी इसकी सिफारिश की। यह प्रस्ताव 24 फरवरी, 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था। लेकिन, यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सबकी सहमति न होने के कारण मैंने इस फैसले (कार्यकाल बढ़ाने) को टालने का निर्णय लिया।”
चंद्रशेखरन का 10 साल का शानदार कार्यकाल
2017 में टाटा संस की कमान संभालने के बाद से, एन. चंद्रशेखरन ने ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने एयरलाइंस (Air India), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (बैटरी) और डिजिटल बिजनेस जैसे कई नए क्षेत्रों में भारी निवेश किया और सफलता हासिल की। वे वर्तमान में टीसीएस, टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कई बड़ी टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं। उनके जाने से पूरे ग्रुप की रणनीतियों पर गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
टाटा ट्रस्ट्स में चल रही है अंदरूनी खींचतान
यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर पहले से ही खींचतान चल रही है। हाल ही में टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है (हालांकि वे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे)। विवाद की मुख्य वजह टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने का मुद्दा है। विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन जैसे ट्रस्टी कंपनी को लिस्ट करने (IPO लाने) का समर्थन कर रहे हैं, जबकि नोएल टाटा इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।






