AMCA Fighter Jet: भारत में बनेगा स्वदेशी फाइटर इंजन, रिलायंस और रोल्स-रॉयस की डील से पाकिस्तान तक मची खलबली!

AMCA Fighter Jet: भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक बेहद अहम खबर सामने आई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और ब्रिटेन की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी रोल्स-रॉयस (Rolls-Royce) ने भारत में अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान (Fighter Jet) इंजन के विकास और निर्माण के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है।
इस साझेदारी का मुख्य लक्ष्य भारत के सबसे महत्वाकांक्षी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम के लिए एक पूरी तरह स्वदेशी और शक्तिशाली कॉम्बैट इंजन तैयार करना है। भारत की इस रक्षा डील (Defense Deal) की गूंज पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान (Pakistan) तक सुनाई दे रही है और वहां की मीडिया में इसे प्रमुखता से छापा गया है।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- रिलायंस-रोल्स रॉयस डील: भारत में लड़ाकू विमान के स्वदेशी इंजन निर्माण के लिए रणनीतिक साझेदारी।
- AMCA प्रोजेक्ट: यह डील भारत के 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर ‘AMCA’ के इंजन पर केंद्रित है।
- क्षमता विकास: उद्देश्य सिर्फ असेंबल करना नहीं, बल्कि डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की पूरी क्षमता भारत में लाना है।
- पाकिस्तान की नजर: इस रक्षा समझौते ने पाकिस्तान और चीन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
क्या है रिलायंस-रॉल्स रॉयस की पूरी डील?
प्रस्तावित साझेदारी के तहत रिलायंस और रोल्स-रॉयस मिलकर भारत में लड़ाकू विमान के लिए इंजन की ‘डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और डिलीवरी’ की क्षमता विकसित करेंगे। दोनों कंपनियां भारत में एक समर्पित Aerospace Gas Turbine Complex स्थापित करने की योजना बना रही हैं।
- लक्ष्य क्या है? इसका मकसद सिर्फ किसी विदेशी इंजन को भारत लाकर असेंबल (Assemble) करना नहीं है, बल्कि भविष्य के एयरो-इंजन के लिए भारत में ही डिजाइनिंग और सप्लाई चेन तैयार करना है। यानी, इंजन ‘खरीदने’ वाले भारत को इंजन ‘बनाने’ वाला भारत बनाना है।
- इस प्रोजेक्ट में रिलायंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर लाएगा, जबकि रोल्स-रॉयस अपनी एडवांस्ड प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी (Propulsion Technology) की विशेषज्ञता साझा करेगा।
AMCA के लिए क्यों इतना अहम है यह इंजन?
AMCA भारत का प्रस्तावित ट्विन-इंजन, पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर (5th Gen Stealth Fighter) है। किसी भी लड़ाकू विमान की ताकत सिर्फ उसके रडार या हथियारों से तय नहीं होती, बल्कि उसका इंजन उसकी असली क्षमता की नींव होता है।
- एक अत्याधुनिक फाइटर जेट के इंजन में बेहद उच्च तापमान और दबाव पर काम करने की क्षमता होनी चाहिए। दुनिया के गिने-चुने देश ही इस हाई-थ्रस्ट तकनीक में सक्षम हैं।
- AMCA के भविष्य के संस्करण (Mk2) के लिए कम से कम 120 kN या उससे ज्यादा थ्रस्ट (Thrust) वाले दमदार इंजन की जरूरत है। इसी 120 kN क्लास के इंजन के लिए रोल्स-रॉयस ने रिलायंस के साथ हाथ मिलाया है।
(नोट: भारत के पास पहले से कावेरी इंजन कार्यक्रम था, लेकिन वह जरूरी थ्रस्ट हासिल नहीं कर पाया। जुलाई 2026 में DRDO ने 350 KG थ्रस्ट का एक्सपेंडेबल इंजन विकसित किया है, लेकिन AMCA के लिए उससे कहीं ज्यादा शक्तिशाली तकनीक चाहिए।)
क्या भारत को पूरी टेक्नोलॉजी मिल जाएगी? (Technology Transfer)
रोल्स-रॉयस काफी समय से भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और लोकल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) क्षमता विकसित करने की बात कर रहा है। हालांकि, मौजूदा रिलायंस-रोल्स रॉयस घोषणा में तकनीकी और कानूनी शर्तों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए यह मान लेना कि 100% तकनीक तुरंत मिल जाएगी, अभी जल्दबाजी होगी। सरकार और कंपनियों के बीच कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद ही असली तस्वीर साफ होगी।
क्या रेस से बाहर हो गई है फ्रांस की साफरान (Safran)?
बिल्कुल नहीं! AMCA के स्वदेशी इंजन को लेकर रोल्स-रॉयस और फ्रांस की कंपनी साफरान (Safran) के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। साफरान भी भारत को अपना प्रस्ताव दे चुकी है। अंतिम फैसला भारत सरकार कई पैमानों (लागत, तकनीकी क्षमता, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) पर परखने के बाद ही लेगी। बता दें कि AMCA के शुरुआती (Mk1) संस्करण के लिए पहले से ही अमेरिकी कंपनी GE Aerospace (F414 इंजन) का इस्तेमाल होना तय है।
पाकिस्तान में क्यों हो रही है इस डील की चर्चा?
पाकिस्तानी मीडिया ने रिलायंस-रॉल्स रॉयस साझेदारी पर प्रमुखता से रिपोर्टिंग की है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि AMCA सिर्फ भारत का एक फाइटर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में भविष्य के एयर-पावर बैलेंस (Air Power Balance) को पूरी तरह से बदल सकता है।
जहां पाकिस्तान, चीन की मदद से अपने लड़ाकू विमानों को मजबूत कर रहा है, वहीं भारत का अपने ही देश में हाई-थ्रस्ट फाइटर इंजन बनाने की क्षमता हासिल करना पूरे इलाके (Region) के लिए गहरा रणनीतिक महत्व रखता है। इस साझेदारी की सबसे बड़ी उपलब्धि कोई एक इंजन नहीं, बल्कि भारत में ‘इंजन बनाने की स्वदेशी क्षमता’ का विकास होना है।






