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Mukesh Chandrakar Murder Case: दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्रकार हत्याकांड में नया मोड़। जगदलपुर जेल में बंद मुख्य आरोपी पर गवाहों को खरीदने और धमकाने का आरोप।

बीजापुर: दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्रकार हत्याकांड (Mukesh Chandrakar Murder Case) में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बीजापुर और बस्तर के पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी सुरेश चंद्रकार जगदलपुर की केंद्रीय जेल के भीतर से ही गवाहों को प्रभावित कर रहा है।

आरोप है कि गवाहों को अपना बयान बदलने के लिए भारी-भरकम रकम का प्रलोभन दिया जा रहा है और धमकाया जा रहा है। इस संबंध में एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद स्थानीय पत्रकारों में भारी आक्रोश है।

सुनील मर्सकोले पर गवाहों को धमकाने का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे अहम गवाह बीजापुर के ही स्थानीय पत्रकार हैं। वायरल ऑडियो और पत्रकारों की शिकायत के अनुसार, एक अन्य पत्रकार सुनील मर्सकोले सीधे तौर पर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्रकार के संपर्क में है। आरोप है कि मर्सकोले ही मुख्य आरोपी के इशारे पर गवाह पत्रकारों पर बयान बदलने का दबाव बना रहा है और उन्हें आर्थिक प्रलोभन (रिश्वत) दे रहा है।

जगदलपुर सेंट्रल जेल प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

इस खुलासे के बाद केंद्रीय जेल जगदलपुर (Jagdalpur Central Jail) की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • पत्रकारों ने सवाल उठाया है कि हत्या जैसे संगीन अपराध में जेल में बंद एक कैदी को इतनी स्वतंत्रता कैसे मिल रही है?
  • आरोपी लगातार मोबाइल फोन (चलभाष) के माध्यम से बाहरी लोगों के संपर्क में कैसे है?
  • पत्रकारों का सीधा आरोप है कि पैसे के बल पर जेल के भीतर से पूरा तंत्र संचालित किया जा रहा है और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने जेल प्रशासन की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

ASP को सौंपा ज्ञापन, की ये 3 प्रमुख मांगें

वायरल ऑडियो और गवाहों पर बन रहे दबाव से क्षुब्ध होकर बीजापुर के पत्रकारों ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) चंद्रकांत गवर्ना को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। पत्रकारों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. निष्पक्ष जांच: इस पूरे प्रकरण और गवाहों को धमकाने के मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की जाए।
  2. ऑडियो की पड़ताल: वायरल हो रहे कथित ऑडियो की फोरेंसिक जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई हो।
  3. न्यायालय के संज्ञान में लाया जाए: सरकारी वकील (अभियोजन पक्ष) के माध्यम से इस गंभीर विषय को तुरंत माननीय न्यायालय के संज्ञान में लाया जाए ताकि गवाहों को सुरक्षा मिल सके।

ये पत्रकार रहे मौजूद: एएसपी को ज्ञापन सौंपने के दौरान पी. रंजन दास, पवन दुर्गम, गणेश मिश्रा, पुष्पा रोकड़े, नितिन रोकड़े, चेतन कापेवार, सतीश अल्लूर, भरत दुर्गम, संतोष तिवारी और घनश्याम यादव शामिल रहे। इस अवसर पर बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र महापात्र और बादशाह खान भी विशेष रूप से उपस्थित थे।

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