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PRSU Gems and Jewellery Course Scam: ‘जेम्स एंड ज्वेलरी’ कोर्स में 50 लाख के फंड का गोलमाल! सराफा एसोसिएशन ने राज्यपाल से की जांच की मांग

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। विश्वविद्यालय में संचालित होने वाले ‘जेम्स एंड ज्वेलरी’ (Gems and Jewellery) कोर्स में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। रायपुर सराफा एसोसिएशन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीधे राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा इस रोजगारोन्मुखी कोर्स के लिए 50 लाख रुपये का भारी-भरकम फंड दिया गया था, इसके बावजूद इस सत्र में छात्रों का प्रवेश न के बराबर (जीरो एडमिशन) रहा और राशि के इस्तेमाल में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई।

50 लाख का फंड, लेकिन एडमिशन ‘जीरो’

रायपुर सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू के नेतृत्व में व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को इस संबंध में एक विस्तृत पत्र भेजा है। व्यापारियों ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सरकार ने युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए 50 लाख रुपये का अनुदान दिया था, मगर वर्तमान शैक्षणिक सत्र में छात्रों का प्रवेश नगण्य रहा। व्यापारियों ने इस फंड के बड़े पैमाने पर मिसयूज (दुरुपयोग) होने की गहरी आशंका जताई है।

कुलपति से नहीं मिला कोई संतोषजनक जवाब

एसोसिएशन ने अपनी शिकायत में बताया कि राज्यपाल के निर्देश के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया। इसके बावजूद, प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट या समयबद्ध जवाब नहीं दिया गया, जो विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रशासन की 4 बड़ी खामियां

व्यापारियों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की चार बड़ी कमियों को उजागर किया है:

  1. कोई समीक्षा नहीं: कोर्स की प्रगति को लेकर अब तक कोई भी समीक्षा बैठक आयोजित नहीं की गई है।
  2. प्लेसमेंट का अभाव: कोर्स पूरा करने वाले छात्रों के प्लेसमेंट (Placement) के लिए प्रबंधन के पास कोई रोडमैप नहीं है।
  3. प्रवेश में लापरवाही: नए छात्रों का प्रवेश (Admission) बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
  4. संवादहीनता: विश्वविद्यालय प्रशासन ने सराफा एसोसिएशन या संबंधित पक्षों के साथ कोई औपचारिक पत्राचार तक नहीं किया।

फेल हो रहा है ‘स्किल इंडिया’ का मकसद

हरख मालू ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस कोर्स को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सराफा व्यवसाय में रोजगार के लिए तैयार करना और केंद्र सरकार के ‘स्किल इंडिया’ (Skill India) मिशन को मजबूत करना था। लेकिन विश्वविद्यालय की प्रशासनिक लापरवाही और लचर रवैये के कारण इस कोर्स का मूल मकसद ही फेल होता नजर आ रहा है।

सराफा एसोसिएशन की राज्यपाल से 3 प्रमुख मांगें

इस पूरे विवाद के बीच, एसोसिएशन ने राज्यपाल के समक्ष निम्नलिखित तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. पारदर्शी संचालन: कोर्स का नियमित और पूरी तरह से पारदर्शी संचालन सुनिश्चित किया जाए।
  2. फंड की जांच: राज्य सरकार द्वारा दिए गए 50 लाख रुपये की राशि के उपयोग की उच्च स्तरीय जांच हो।
  3. टाइमबाउंड प्लान: विश्वविद्यालय प्रशासन इस कोर्स के पुनरुद्धार (Revival) के लिए एक समयबद्ध योजना (Timebound Plan) बनाकर प्रस्तुत करे।

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