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CGPSC Scam Chhattisgarh: पूर्व सचिव के बेटे ने घर में रखकर रटे थे पेपर, प्री और मेंस का रोल नंबर भी था सेम

रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC Scam Chhattisgarh) घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने कई गहरे राज उगले हैं। इस महाघोटाले में जिम्मेदारों ने अपने चहेतों को पास कराने के लिए किस्म-किस्म के हथकंडे अपनाए और खुद ही अपने खिलाफ सुराग भी छोड़ दिए। सबसे हैरान करने वाला मामला पीएससी के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव और उनके बेटे सुमित ध्रुव का है। डिप्टी कलेक्टर बनने की चाह में सुमित ने अपने घर में ही पीएससी परीक्षा के सारे पेपर छिपाकर रखे हुए थे, जो बाद में सीबीआई (CBI) के छापे में बरामद हुए।

प्री और मेंस एग्जाम का एक ही रोल नंबर! CGPSC Scam Chhattisgarh

पीएससी घोटाले की बहती गंगा में तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने भी जमकर हाथ धोए और अपने बेटे सुमित को डिप्टी कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंचा दिया। लेकिन इस फर्जीवाड़े में कई बड़ी चूक हुईं:

  • समान रोल नंबर: जांच में यह साबित हो चुका है कि सुमित ध्रुव का प्रारंभिक (Pre) और मुख्य (Mains) परीक्षा में एक ही रोल नंबर था, जो सामान्य प्रक्रिया के सख्त खिलाफ है।
  • परीक्षा की तारीखें: सुमित ने 26 मई 2022 से 29 मई 2022 के दौरान CGPSC 2021 की मुख्य परीक्षा दी थी और दोनों स्तरों पर उनका रोल नंबर नहीं बदला गया।
  • पुराने पेपर का इस्तेमाल: जांच में पता चला है कि CGPSC 2020 की परीक्षा के लिए दो सेट प्रश्न-पत्र तैयार किए गए थे। इनमें से एक का इस्तेमाल 2020 में हुआ, जबकि दूसरा सेट एग्जाम कंट्रोलर आरती वासनिक द्वारा स्ट्रांग रूम में रखवा दिया गया था। यही दूसरा सेट 2021 की मुख्य परीक्षा में इस्तेमाल कर लिया गया।

टामन सोनवानी और आरती वासनिक की प्रिंटर से सांठगांठ

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले की पटकथा 2020 में ही लिख दी गई थी।

जुलाई 2020 में टामन सिंह सोनवानी और आरती वासनिक ने ‘एकेडी प्रिंटर्स प्रायवेट लिमिटेड’ के संचालक अरुण कुमार द्विवेदी के साथ एक गुप्त मुलाकात की थी। (CGPSC Scam Chhattisgarh) इस बैठक में प्रश्न-पत्र छपाई को लेकर एक विशेष समझौता हुआ, जिस पर आरती वासनिक ने हस्ताक्षर किए थे।

हैरानी की बात यह है कि आरती वासनिक ने नियमों को ताक पर रखकर एक साल तक प्रश्न-पत्रों को प्रिंटर अरुण कुमार द्विवेदी के पास ही छोड़ दिया था। टामन सोनवानी और आरती वासनिक को 2020-21 की मुख्य परीक्षा में पूछे जाने वाले सभी सवालों की पूरी जानकारी पहले से थी।

घर पर बैठकर रटे पेपर 07 के जवाब, CBI छापे में खुली पोल

घोटालेबाजों का दुस्साहस इस कद्र बढ़ गया था कि डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन होने के बाद भी सुमित ध्रुव के घर में वे सारे फर्जीवाड़े वाले दस्तावेज ज्यों के त्यों रखे रहे।

  • जब CBI ने जीवन किशोर ध्रुव के ठिकानों पर छापा मारा, तो सुमित ध्रुव के पास से प्रश्न-पत्र और उत्तरों की फोटोकॉपी बरामद हुई।
  • इन दस्तावेजों में परीक्षा के अभ्यास प्रश्नों के सटीक उत्तर शामिल थे।
  • जांच से यह साफ हो गया कि सुमित को अपने पिता की मदद से मुख्य परीक्षा से पहले ही ‘पेपर नंबर 07’ के सभी सवालों की जानकारी मिल गई थी, जिसका उसने घर पर अभ्यास किया था।

एक नजर में: CGPSC घोटाले के मुख्य किरदार

CGPSC Scam Chhattisgarh: जांच के आधार पर यह स्पष्ट हो चुका है कि CGPSC 2020 और 2021 की परीक्षाओं की गोपनीयता भंग करने और इस पूरी आपराधिक साजिश को रचने में चार मुख्य लोगों की भूमिका रही है:

नामतत्कालीन पद/भूमिकाघोटाले में मुख्य भूमिका
टामन सिंह सोनवानीपूर्व अध्यक्ष, CGPSCप्रिंटर से सांठगांठ, 2020-21 के प्रश्न पत्रों की पूर्व जानकारी और धांधली का नेतृत्व।
जीवन किशोर ध्रुवपूर्व सचिव, CGPSCअपने बेटे को पेपर उपलब्ध कराना और परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर कर उसे डिप्टी कलेक्टर बनाना।
आरती वासनिकएग्जाम कंट्रोलरप्रश्न-पत्र नं 02 और 07 पर नियंत्रण, प्रिंटर के पास एक साल तक पेपर रखना।
सुमित ध्रुवअभ्यर्थी (डिप्टी कलेक्टर)परीक्षा से पहले घर पर उत्तरों का अभ्यास, प्री और मेंस में एक ही रोल नंबर का इस्तेमाल।
ललित गणवीरअन्य आरोपी अधिकारीसाजिश को अंजाम देने में अन्य अधिकारियों का सहयोग करना।

इन सभी आरोपियों की मिलीभगत से सुमित ने परीक्षा में सफलता प्राप्त की और डिप्टी कलेक्टर का पद हथिया लिया। अब जांच एजेंसियों के शिकंजे से इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हो रहा है।

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