
नई दिल्ली: Child Labour Act Special Cell बनाने का निर्देश देकर सुप्रीम कोर्ट ने देश में बाल श्रम पर रोक के कानून को सख्ती से लागू करने की राह खोली है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया है कि वे एक स्पेशल सेल बनाएं, जो बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 के अमल पर लगातार नजर रखे। यह कानून 2016 में संशोधित किया गया था।
राज्यों के मुख्य सचिवों के जरिए होगा पालन
जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से कानून लागू करने वाली एजेंसियों को जरूरी निर्देश जारी करे, ताकि जमीनी स्तर पर कानून का असरदार पालन हो सके। अदालत ने कहा कि यह कदम बच्चों और किशोरों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है।
किस मामले में आया आदेश
पीठ ने यह निर्देश हेल्थ फॉर मिलियंस बनाम भारत सरकार मामले में एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए दिए। याचिका में बाल श्रम कानून की कुछ धाराओं, खासकर धारा 3 को चुनौती दी गई थी। यह धारा पहले बच्चों को केवल कुछ तय खतरनाक कामों में लगाने पर ही रोक लगाती थी। बाद में 2016 के संशोधन के जरिए कानून का दायरा बढ़ाया गया और इसमें किशोरों को भी शामिल किया गया।
Child Labour Act Special Cell से क्या बदलेगा
अब तक बाल श्रम कानून के पालन की निगरानी अलग-अलग विभागों और राज्यों के भरोसे रहती थी। स्पेशल सेल बनने से केंद्र के स्तर पर एक तय व्यवस्था होगी, जो राज्यों से रिपोर्ट लेकर कानून के पालन की स्थिति पर नजर रखेगी। ढाबों, फैक्ट्रियों, ईंट भट्ठों और घरेलू काम में बच्चों से मजदूरी कराने के मामलों पर इससे सख्ती बढ़ने की उम्मीद है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
इसी साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने एक दूसरी जनहित याचिका पर भी केंद्र से जवाब मांगा था, जिसमें ऑर्केस्ट्रा, डांस बार, स्पा और मसाज पार्लर जैसे कामों में 18 साल से कम उम्र के बच्चों को लगाने पर पूरी तरह रोक की मांग की गई थी। तब अदालत ने इसे गंभीर मुद्दा बताया था।
बाल श्रम की शिकायत पेंसिल पोर्टल या चाइल्डलाइन नंबर 1098 पर की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की खबरें और देश की बड़ी खबरें जनदखल पर पढ़ें।






