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chhattisgarh wedding tradition: ससुर पहले अंगारों पर नाचता है, फिर शुरू होती है बहू की अग्नि परीक्षा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर क्षेत्र में स्थित बिलासपुर गांव आज के आधुनिक युग में भी एक ऐसी रस्म को जीवित रखे हुए है, जिसे जानकर और देखकर कोई भी दंग रह जाए। हालांकि आपने शादियों में कई तरह के रिवाज देखे होंगे, लेकिन यहां का रिवाज बेहद अनोखा और खौफनाक है।

दरअसल, इस गांव के राठिया परिवार में नई दुल्हन को घर के अंदर पहला कदम रखने से पहले दहकते हुए अंगारों पर चलना पड़ता है। यह परंपरा सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक ‘अग्नि परीक्षा’ की तरह देखी जाती है।

100 वर्षों से चली आ रही है अनोखी रस्म

रायगढ़ के इस गांव में रहने वाले राठिया परिवार के लिए यह मान्यता पिछले 100 सालों से भी ज्यादा समय से चली आ रही है। हाल ही में एक विवाह समारोह के बाद, जब बारात वापस लौटी, तो पूरे गांव की मौजूदगी में इस कठिन अग्नि परंपरा का आयोजन किया गया।

इस रस्म की शुरुआत दूल्हा-दुल्हन के गांव पहुंचने से पहले ही हो जाती है। परंपरा के अनुसार, दुल्हन के स्वागत के लिए पूरा परिवार कड़े उपवास पर रहता है। परिवार के सदस्य रविवार की रात से लेकर सोमवार सुबह तक, जब तक बहू घर में प्रवेश नहीं कर लेती, तब तक पानी की एक बूंद भी नहीं पीते हैं।

ससुर का अंगारों पर नृत्य और फिर बहू की परीक्षा

गांव पहुंचने पर नवदंपत्ति का भव्य स्वागत होता है, जिसके बाद मुख्य रस्म शुरू होती है। मड़वा (मंडप) के पास विधि-विधान से बकरे की बलि दी जाती है और मड़वा को कपड़ों से ढंक दिया जाता है। रस्म के दौरान, दूल्हे के पिता पर कथित रूप से कुल देवता का आव्हान होता है। इसके बाद, वे चूल्हे से धधकते हुए लाल अंगार लाकर मंडप के बीचों-बीच बिछा देते हैं और खुद उन दहकते हुए अंगारों पर नाचने लगते हैं।

पिता के नृत्य के बाद, दूल्हा और दुल्हन एक दूसरे का हाथ थामकर उन्हीं अंगारों के ऊपर सात फेरे लेते हैं। हालांकि अंगारों पर चलने के बावजूद, उन्हें कोई चोट नहीं आती है। राठिया परिवार का मानना है कि अग्नि पर चलना पवित्रता और सामर्थ्य का प्रतीक है।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, बिलासपुर गांव में गंधेल गोत्र के केवल दो ही परिवार निवास करते हैं, और यह परंपरा इन्हीं परिवारों में सीमित है। परिवार के बुजुर्ग भी यह नहीं बता पाते कि इसकी सटीक शुरुआत कब हुई, लेकिन पूर्वजों के प्रति अगाध श्रद्धा के कारण नई पीढ़ी भी इसे सहर्ष स्वीकार करती है। माना जाता है कि जो जोड़ा अंगारों पर चलकर घर में प्रवेश करता है, वह जीवन की कठिनाइयों को मिलकर सहने की शक्ति प्राप्त कर लेता है।

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