Raipur Central Jail News: प्याज और बिस्किट में छिपाकर भेज रहे थे गांजा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल से एक बहुत ही हैरान करने वाली खबर सामने आई है. (Raipur Central Jail News) जेल के अंदर बंद कैदियों तक गांजा, नशीली गोलियां और तंबाकू पहुंचाने के लिए तस्करों ने ऐसे-ऐसे तरीके निकाले, जिन्हें देखकर पुलिस और जेल प्रशासन भी सन्न रह गया.
पिछले 1 महीने के दौरान कैदियों से मुलाकात करने आए उनके परिवार वालों ने प्याज, नहाने के साबुन और सील पैक बिस्किट के पैकेट के अंदर यह नशीला सामान छिपाकर जेल में भेजने की कोशिश की. हालांकि, जेल की कड़ी चेकिंग में उनकी यह चाल पकड़ी गई.
तस्करी के लिए अपनाए गए 3 हैरान करने वाले तरीके, Raipur Central Jail News
जेल प्रशासन ने जब सामान की तलाशी ली, तो तस्करी के 3 सबसे हैरान करने वाले तरीके सामने आए:
- प्याज के अंदर गांजा: कैदियों के घरवालों ने 1 बड़ी प्याज को अंदर से खोखला कर दिया और उसमें गांजे की छोटी-छोटी पुड़ियां भर दीं. इसके बाद प्याज को ऐसे चिपकाया गया कि वह बाहर से बिल्कुल आम प्याज लगे.
- सील पैक बिस्किट में नशीली गोलियां: कुछ लोगों ने बिस्किट के सील पैक को बहुत ही चालाकी से खोला, उसके अंदर नशीली गोलियां और तंबाकू रखा, और फिर से पैकेट को ऐसे सील कर दिया जैसे वह सीधा फैक्ट्री से आया हो.
- साबुन के अंदर नशा: नहाने वाले साबुन की टिकिया को बीच से काटकर उसके अंदर नशीला सामान छिपाया गया था.
Raipur Central Jail News: कड़ी चेकिंग के दौरान इन सभी चीजों को जब्त कर लिया गया और नियमों के तहत कार्रवाई की गई.
अब जेल कैंटीन से ही मिलेगा रोजमर्रा का सामान, Raipur Central Jail News
लगातार ऐसे मामले सामने आने के बाद रायपुर जेल प्रशासन ने 1 बड़ा और सख्त फैसला लिया है. जेल की सुरक्षा को और पुख्ता करते हुए यह तय किया गया है कि कैदियों के रोजाना इस्तेमाल (दैनिक उपयोग) का कुछ खास सामान अब केवल जेल की कैंटीन से ही मिलेगा.
Raipur Central Jail News: फिलहाल यह व्यवस्था कुछ वक्त के लिए लागू की गई है. हालांकि, परिवार वाले बाकी मंजूर की गई चीजें पहले की तरह ही दे सकेंगे.
बाजार से सस्ते रेट पर मिलेगा सामान
जेल प्रशासन ने बताया कि नशीले सामान की तस्करी रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है. कैंटीन में मिलने वाला सभी सामान बहुत अच्छी क्वालिटी का होगा. सबसे अच्छी बात यह है कि इस सामान की कीमत आम बाजार के रेट से कम रखी गई है, ताकि कैदियों के परिवार वालों पर कोई फालतू पैसों का बोझ न पड़े.






