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Congress in Tamil Nadu: जल्दबाजी कर फंसी कांग्रेस? टीवीके को समर्थन देने से एमके स्टालिन ने बढ़ाई मुश्किलें

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सुपरस्टार जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके (TVK) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन सरकार बनाने के जादुई आंकड़े (118) से वह कुछ कदम दूर रह गई। ऐसे में सत्ता की चाबी उन छोटे दलों के पास आ गई, जिन्होंने चुनाव किसी और के साथ लड़ा था। इसी सत्ता के समीकरण में Congress in Tamil Nadu ने अपने पुराने और मजबूत सहयोगी डीएमके (DMK) का साथ छोड़कर टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। अब कांग्रेस का यही फैसला उसके लिए गले की फांस बनता दिख रहा है।

क्या है पूरा मामला?

तमिलनाडु में इस बार डीएमके को करारी हार का सामना करना पड़ा है। एमके स्टालिन की पार्टी महज 59 सीटों पर सिमट गई है, जबकि एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं। वहीं, कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। जैसे ही यह साफ हुआ कि टीवीके को सरकार बनाने के लिए करीब 10 विधायकों की जरूरत है, कांग्रेस ने बिना समय गंवाए ‘शर्तों’ के साथ टीवीके को समर्थन देने की घोषणा कर दी।

वामदलों और वीसीके के साथ मिलकर टीवीके का आंकड़ा आसानी से 118 के पार जा रहा है। लेकिन कांग्रेस की इस जल्दबाजी ने 2004 से चले आ रहे डीएमके-कांग्रेस गठबंधन में बड़ी दरार पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर INDIA अलायंस पर पड़ना तय है।

एमके स्टालिन की रणनीति कैसे बढ़ाएगी कांग्रेस की मुश्किल?

कांग्रेस ने भले ही तमिलनाडु में सत्ता का स्वाद चखने के लिए पाला बदल लिया हो, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में इसका उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है:

  • संसद में डीएमके की ताकत: एमके स्टालिन भले ही राज्य में चुनाव हार गए हों (यहां तक कि वह अपनी कोलाथुर सीट भी नहीं बचा पाए), लेकिन केंद्र में उनके पास 32 सांसद (22 लोकसभा और 10 राज्यसभा) हैं। डीएमके की यह ताकत संसद में इंडिया गठबंधन का एक बड़ा आधार रही है।
  • स्टालिन का ‘रिवर्स गियर’: राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि स्टालिन सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और एनडीए (NDA) की ओर रुख कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो केंद्र में एनडीए का संख्या बल और मजबूत हो जाएगा और कांग्रेस नेतृत्व वाला इंडिया गठबंधन कमजोर पड़ जाएगा।
  • राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस का विरोध: डीएमके आने वाले दिनों में संसद और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ खड़ी होकर कांग्रेस को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति अपना सकती है।

डीएमके का पलटवार

कांग्रेस के इस कदम पर डीएमके नेता कनिमोझी ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव साथ लड़ने के बाद कांग्रेस का यह रवैया चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, “हम कई चुनाव साथ लड़े और जीते। इस बार हम साथ लड़े और हार गए। किसी भी दल को अपना रास्ता चुनने का अधिकार है, लेकिन एमके स्टालिन हमेशा सहयोगियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं।”

आगे क्या होगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु की राजनीति अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। कांग्रेस ने एक राज्य में सरकार का हिस्सा बनने के लिए एक बड़ा और मजबूत राष्ट्रीय सहयोगी दांव पर लगा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एमके स्टालिन का अगला कदम क्या होता है और यह ‘पाला-बदल’ कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर कितना भारी पड़ता है।

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