Bilaspur Road Construction Scam: 1.40 करोड़ की सड़क छाप सड़क…PWD और ठेकेदार के भ्रष्टाचार का वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिले के मस्तूरी ब्लॉक में 1 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से बनाई गई एक किलोमीटर लंबी सड़क कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है। हालात इतने खराब हैं कि सड़क पर बिछाया गया डामर हाथों से पपड़ी की तरह निकल रहा है। स्थानीय लोगों ने इस घटिया निर्माण का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है।
ठेकेदार और PWD अफसरों की मिलीभगत का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, यह विवादित सड़क मस्तूरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत अमगांव के आश्रित ग्राम आमाकोनी से बहतरा तक बनाई गई है।
- ठेका और निर्माण एजेंसी: सड़क बनाने का ठेका पीडब्ल्यूडी (PWD) निर्माण एजेंसी द्वारा ठेकेदार अतुल शुक्ला को दिया गया था।
- मुरूम की जगह मिट्टी: स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया है। सड़क का बेस मजबूत करने के लिए मुरूम डाला जाना था, लेकिन ठेकेदार ने पैसे बचाने के लिए वहां सिर्फ मिट्टी बिछा दी।
- गुणवत्ता की अनदेखी: सड़क पूरी तरह से तैयार भी नहीं हुई है और जगह-जगह से गिट्टियां बाहर निकलने लगी हैं। हल्का सा दबाव पड़ते ही डामर की परत उखड़ रही है।
जनप्रतिनिधियों ने किया निरीक्षण, कलेक्टर से की शिकायत
सड़क की दुर्दशा का वीडियो वायरल होने और ग्रामीणों की नाराजगी के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि हरकत में आए। जनपद सभापति, मंडल अध्यक्ष, महामंत्री और सरपंच ने खुद मौके पर जाकर सड़क की गुणवत्ता की जांच की।
स्थिति का जायजा लेने के बाद जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के कार्यालय पहुंचकर इस पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर को वह वीडियो भी सौंपा है जिसमें डामर की परतें हाथ से निकलती हुई साफ दिखाई दे रही हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी: सुधार नहीं हुआ तो करेंगे चक्काजाम
ग्रामीणों में शासन की लाखों रुपए की राशि के इस तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पहली ही बारिश में यह मिट्टी के बेस वाली सड़क पूरी तरह से धंस जाएगी।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि घटिया निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि तत्काल इस सड़क की तकनीकी जांच कराकर ठेकेदार और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई और गुणवत्तापूर्ण सड़क दोबारा नहीं बनाई गई, तो ग्रामीण उग्र चक्काजाम और विरोध-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।



