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Chhattisgarh Jail Overcrowding: छत्तीसगढ़ जेल ओवरक्राउडिंग: प्रदेश की सभी जेलें हाउसफुल, क्षमता से दोगुने कैदी

छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की संख्या निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक हो चुकी है। दरअसल हालात इतने गंभीर हैं कि प्रदेश की जेलों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। इसके अलावा आंकड़ों से पता चलता है कि सजायाफ्ता कैदियों से ज्यादा संख्या उन विचाराधीन बंदियों की है जिनकी सुनवाई अभी भी अदालतों में लंबित है। परिणामस्वरूप जेलों में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव देखने को मिल रहा है।

रायपुर जेल में क्षमता से ढाई गुना कैदी

राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि जेल मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक कुछ जिला और उपजेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से कम है लेकिन प्रमुख जेलों का हाल बेहाल है। आरटीआई एक्टिविस्ट संजय थुल द्वारा मांगी गई जानकारी में जनसूचना अधिकारी प्रफुल्ल कुमार जोशी ने कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं।

  • प्रदेश की कुल जेलों की क्षमता चौदह हजार नौ सौ तिहत्तर है।
  • वर्तमान में जेलों के अंदर इक्कीस हजार पांच सौ अठारह कैदियों को रखा गया है।
  • विचाराधीन कैदियों की संख्या चौदह हजार तीन सौ उनचास पहुंच चुकी है।
  • सजा काट रहे कैदियों की संख्या सात हजार एक सौ उनहत्तर है।
  • विचाराधीन बंदियों में नौ सौ पांच महिलाएं भी शामिल हैं।

विचाराधीन बंदियों की बढ़ती संख्या और मानवाधिकार

जेलों में क्षमता से अधिक भीड़ होने का मुख्य कारण विचाराधीन बंदियों की बढ़ती तादाद है। दरअसल कई कैदी ऐसे हैं जो छोटे अपराधों में बंद हैं या फिर जमानत के अभाव में जेलों में रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा कई बार सुनवाई के लिए कैदियों को समय पर अदालत नहीं ले जाया जाता है जिससे उनकी रिहाई में अनावश्यक देरी होती है। ओवरक्राउडिंग के कारण कैदियों को चिकित्सा और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की गई है ताकि रिहाई योग्य बंदियों को न्याय मिल सके।

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