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CG Health Scam: 7 राज्यों में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से छत्तीसगढ़ में करोड़ों की दवा खरीदी, मरीजों की जान से खिलवाड़, विवाद पर CGMSC ने दी सफाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज और उन्हें दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस दवा कंपनी (यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड) को मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत सात राज्यों ने खराब गुणवत्ता के कारण ब्लैकलिस्ट कर दिया था, उसी कंपनी से छत्तीसगढ़ में लगातार करोड़ों रुपये की दवाएं खरीदी जा रही थीं। इस लापरवाही ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा खरीदी प्रणाली (CGMSC) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हर महीने 6 करोड़ की आपूर्ति, 184 प्रकार की दवाएं सूत्रों के अनुसार, ‘यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड’ (Unicure India Limited) नामक इस कंपनी से छत्तीसगढ़ के अस्पतालों के लिए लगभग 184 प्रकार की विभिन्न दवाओं की सप्लाई की जा रही थी।

  • बताया जा रहा है कि हर महीने इस कंपनी से करीब 6 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीदी की जा रही थी।
  • हैरानी की बात यह है कि छत्तीसगढ़ में पहले भी इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, इसके बावजूद उसी कंपनी से दोबारा इतनी बड़ी मात्रा में दवा खरीदी का अनुबंध किया गया।

सात राज्यों में बैन है कंपनी यह कंपनी गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने के कारण देश के कई राज्यों में प्रतिबंधित है:

  • मध्य प्रदेश: एमपी पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कारपोरेशन ने गुणवत्ता संबंधी गंभीर शिकायतों के बाद इस कंपनी को वर्ष 2026 तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
  • राजस्थान: यहां भी कंपनी की कुछ दवाएं लैब टेस्टिंग में फेल हो गई थीं, जिसके बाद इसे ब्लैकलिस्ट किया गया।
  • इसके अलावा केरल, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु समेत कुल सात राज्यों में इस कंपनी पर बैन लगा हुआ है।
  • जानकारों का कहना है कि इसी कंपनी का नाम दिल्ली में चिकित्सा उपकरण और दवा खरीद से जुड़े 650 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच में भी सामने आ चुका है।

मरीजों की जान से सीधा खिलवाड़ दवा गुणवत्ता विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता से समझौता करना सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और उनकी जान से खिलवाड़ है। यदि किसी कंपनी के खिलाफ अन्य राज्यों में गंभीर कार्रवाई हो चुकी है, तो छत्तीसगढ़ की नोडल एजेंसी को भी उसकी गुणवत्ता रिपोर्ट और अन्य तथ्यों की कड़ी समीक्षा करनी चाहिए थी।

CGMSC ने दी सफाई: ‘नई खरीदी पर लगाई गई है रोक’ इस भारी विवाद और उठते सवालों के बीच छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) ने अपना पक्ष रखा है।

  • सूचना मिलने पर कार्रवाई: CGMSC का कहना है कि फर्म ने 18 मई 2026 को खुद सूचना दी थी कि 8 मई 2026 को मध्य प्रदेश में उनकी एक दवा (Lactulose Solution IP) के तीन बैच अमानक पाए जाने के कारण उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है।
  • अनुबंध किया गया ब्लॉक: इस सूचना के बाद CGMSC ने निविदा नियमानुसार उस दवा के दर अनुबंध (Rate Contract) को ब्लॉक कर दिया और संबंधित क्रयादेशों (Purchase Orders) को निरस्त कर दिया।
  • मानक परीक्षण के बाद ही हुआ वितरण: CGMSC ने स्पष्ट किया कि फर्म द्वारा पहले से सप्लाई की गई दवाओं को NABL प्रमाणित प्रयोगशालाओं में टेस्ट कराया गया। मानक गुणवत्तायुक्त रिपोर्ट (Standard Quality Report) आने के बाद ही दवाओं का वितरण अस्पतालों में किया गया है।
  • कोई नया ऑर्डर नहीं: ब्लैकलिस्टिंग की सूचना प्राप्त होने के बाद से फर्म के साथ कोई भी नया दर अनुबंध (New Rate Contract) या नया खरीदी आदेश जारी नहीं किया गया है।

हालांकि CGMSC ने सफाई दे दी है, लेकिन एक दागी कंपनी से इतने लंबे समय तक करोड़ों का व्यापार होना पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न जरूर लगाता है।

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