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Fuel Supply Control Order India: पेट्रोल-डीजल संकट टालने के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, खुदरा बिक्री पर लगाई ये सख्त पाबंदियां

देशभर में ईंधन की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। सरकार ने नया Fuel Supply Control Order India जारी करते हुए सामान्य पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) से औद्योगिक और व्यावसायिक (इंडस्ट्रियल और कमर्शियल) उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल-डीजल खरीदने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण देश में ईंधन की कमी न होने पाए, इसके लिए यह आपातकालीन नीति लागू की गई है।

खुदरा पंपों पर डीजल बिक्री की डेली लिमिट तय, बल्क खरीदारों पर रोक

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने फिलहाल इस कड़े प्रतिबंध को 90 दिनों (तीन महीने) के लिए लागू किया है। हालांकि, यदि आने वाले समय में सप्लाई चेन की स्थिति में सुधार होता है, तो इस समय सीमा से पहले भी आदेश वापस लिया जा सकता है। नए नियमों के मुताबिक, अब कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत का ईंधन केवल अधिकृत बल्क सप्लाई पॉइंट्स (Authorized Bulk Supply Points) से ही खरीदना होगा। इसके साथ ही, खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल बिक्री की एक डेली लिमिट भी तय कर दी गई है, जिसके तहत एक वाहन या ग्राहक को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर ही डीजल दिया जा सकेगा।

आम वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं होगा कोई असर

सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि इस नए आदेश से देश के सामान्य नागरिकों, बाइक और कार चालकों या घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। उनके लिए पेट्रोल और डीजल की दैनिक सप्लाई पूरी तरह से सामान्य बनी रहेगी। यह कदम मुख्य रूप से उन बड़े कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स को लक्षित करके उठाया गया है, जो खुदरा पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में ईंधन का उठाव कर रहे थे।

कीमतों में ₹39 का बड़ा अंतर और तेल कंपनियों को भारी नुकसान

दरअसल, इस बड़े फैसले के पीछे रिटेल डीजल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में मौजूद भारी अंतर है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में जहां रिटेल पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है, वहीं बल्क (थोक) ग्राहकों के लिए यही डीजल ₹134.50 प्रति लीटर पड़ता है। इस ₹39 प्रति लीटर के भारी अंतर के कारण कई बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियां और उद्योग बल्क डिपो के बजाय खुदरा पंपों से डीजल खरीद रहे थे, जिससे खुदरा बाजार में किल्लत की स्थिति बनने लगी थी।

सरकारी कंपनियों को उठाना पड़ रहा था भारी वित्तीय बोझ

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके चलते भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—को खुदरा बिक्री पर भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा था। कंपनियों को डीजल पर करीब ₹36.50 प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब ₹9 प्रति लीटर का घाटा हो रहा था। देश के 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से लगभग 90% पर इन्हीं सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है, इसलिए बाजार को असंतुलन से बचाने के लिए सरकार को यह नीतिगत हस्तक्षेप करना पड़ा है।

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