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Weather Update Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में प्री-मानसून की दस्तक, अंधड़ के साथ झमाझम बारिश से लुढ़का पारा

छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए भीषण गर्मी, चुभती धूप और उमस के दौर से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल गया है। बंगाल की खाड़ी से आ रही ठंडी और नमी युक्त हवाओं के कारण राज्य के मैदानी और दक्षिणी इलाकों में प्री-मानसूनी गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। इस लेख में पढ़ें ताजा Weather Update Chhattisgarh और जानें कि आपके शहर में मानसून कब दस्तक देने जा रहा है।

तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज

पिछले सप्ताह तक जहां छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में सूरज की तपिश भारी पड़ रही थी और अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा था, वहीं इस ताजा मानसूनी बारिश के बाद पारे में भारी गिरावट आई है। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मैदानी इलाकों विशेषकर रायपुर और दुर्ग संभाग में अधिकतम तापमान अब गिरकर 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। इसके साथ ही न्यूनतम तापमान में भी 2 से 3 डिग्री की कमी आई है, जिससे रातें अब पहले से कहीं अधिक आरामदायक हो गई हैं।

छत्तीसगढ़ में कब पहुंचेगा मानसून? जानिए सटीक समय

मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर (IMD Raipur) के वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति की वर्तमान स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले 48 से 72 घंटों के भीतर इसके छत्तीसगढ़ के दक्षिणी छोर यानी बस्तर संभाग में प्रवेश करने की पूरी संभावना बनी हुई है। बस्तर में दस्तक देने के बाद मानसून को रायपुर और मध्य छत्तीसगढ़ तक पहुंचने में सामान्यतः 3 से 4 दिन का समय लगता है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि जून के मध्य तक पूरा प्रदेश मानसूनी बारिश से अच्छी तरह सराबोर हो जाएगा।

इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने जारी किया ‘येलो अलर्ट’

मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के लिए बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, रायपुर, गरियाबंद, धमतरी और महासमुंद जिलों में कुछ स्थानों पर वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) और तेज हवाओं (अंधड़) के साथ हल्की से मध्यम वर्षा का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम में अचानक आए इस बदलाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सलाह दी है कि वे मौसम खराब होने या बिजली कड़कने की स्थिति में खेतों से तुरंत निकलकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लें ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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