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Gold-Silver Price: 4 सितंबर को सोने-चांदी में उछाल; 24 कैरेट गोल्ड 967 रुपये चढ़ा, चांदी भी ₹2400 से ज्यादा महंगी

Gold-Silver Price: पीएम मोदी की अपील के बाद सर्राफा बाजार में आई भारी गिरावट के बाद, आज यानी 4 सितंबर को सोने और चांदी की कीमतों (Gold-Silver Price) में फिर से बढ़त देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने और चांदी के दामों में तेज उछाल आया है।

आज का ताजा भाव

  • सोना (24 कैरेट): 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 967 रुपये चढ़कर 1,54,908 रुपये हो गई है।
  • चांदी: एक किलो चांदी की कीमत आज 2,439 रुपये बढ़कर 2,34,972 रुपये पर पहुंच गई है।

इस साल कितना महंगा हुआ सोना?

इस साल सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है:

  • सोना: 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपये पर था, जो अब 1.55 लाख रुपये के करीब पहुंच गया है। यानी इस साल अब तक सोना लगभग 22 हजार रुपये महंगा हो चुका है।
  • चांदी: 31 दिसंबर 2025 को चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो अब 2.35 लाख रुपये पर पहुंच गई है।
  • ऑल-टाइम हाई: गौरतलब है कि इसी साल 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये और चांदी ने 3.86 लाख रुपये का अपना ऑल-टाइम हाई (All-time High) बनाया था।

अलग-अलग शहरों में रेट अलग क्यों होते हैं?

अक्सर लोगों को इंटरनेट और उनके शहर के लोकल ज्वेलर्स के रेट में फर्क नजर आता है। इसके मुख्य रूप से 4 कारण हैं:

  1. ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा का खर्च लगता है।
  2. मांग और खपत: दक्षिण भारत में सोने की खपत सबसे ज्यादा (करीब 40%) है। वहां की खरीद का असर भी कीमतों पर पड़ता है।
  3. लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: राज्य और शहर के एसोसिएशन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने रेट तय करते हैं।
  4. पुराना स्टॉक: ज्वेलर्स का अपना खरीदी रेट तय करता है कि वे ग्राहकों को कितनी कीमत में सोना बेचेंगे।

ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान

  • हॉलमार्क (BIS) जरूरी: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। इस पर 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे- AZ4524) होता है।
  • कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और उस दिन की कीमत को IBJA की वेबसाइट या अन्य भरोसेमंद सोर्सेज से जरूर मिला लें। ध्यान रहे, 24, 22 और 18 कैरेट के रेट अलग-अलग होते हैं।
  • मेकिंग चार्ज (Making Charges): ज्वेलर्स गहने बनवाने के लिए मेकिंग चार्ज लेते हैं, जो फिक्स नहीं होता। इस पर आप मोलभाव कर सकते हैं। बेहतर डील के लिए ज्वेलर्स से लेबर कॉस्ट का पूरा ब्रेकअप मांगें।

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