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Jashpur Butterfly Diversity: जशपुर में तितलियों की 125 प्रजातियां दर्ज, जंगल और पहाड़ों ने बढ़ाई जैव-विविधता की पहचान

छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अपनी हरियाली, जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है। (Jashpur Butterfly Diversity) अब जिले की पहचान में एक और पहलू जुड़ता दिखाई दे रहा है। अलग-अलग वन क्षेत्रों और प्राकृतिक स्थलों में किए गए सर्वे तथा दस्तावेजीकरण के दौरान तितलियों की करीब 125 प्रजातियों का रिकॉर्ड सामने आया है।

तितलियों की विविधता केवल देखने में आकर्षक प्राकृतिक संपदा नहीं है। पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए इनका रिकॉर्ड किसी क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को समझने में भी उपयोगी माना जाता है।

2020 में दर्ज हुई थीं 114 प्रजातियां, Jashpur Butterfly Diversity

उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में किए गए सर्वे के दौरान जशपुर जिले में 114 तितली प्रजातियों को रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों ने जिले के अलग-अलग हिस्सों में तितलियों की पहचान और फोटोग्राफी का काम जारी रखा।

नए रिकॉर्ड सामने आने के साथ जिले में दर्ज प्रजातियों की संख्या बढ़कर करीब 125 तक पहुंच गई है।

यह संख्या यह बताती है कि जशपुर के प्राकृतिक क्षेत्रों में तितलियों के लिए अलग-अलग प्रकार के आवास मौजूद हैं।

जंगल से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक मौजूदगी

जशपुर में तितलियों की निगरानी केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। अलग-अलग वन क्षेत्रों, पहाड़ियों और प्राकृतिक स्थलों में इनके रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं।

गुल्लू और कैलाश गुफा जैसे क्षेत्रों में भी अलग-अलग तितली प्रजातियों (Jashpur Butterfly Diversity) को देखा गया है। ऐसे क्षेत्र जहां जंगल, जलस्रोत, घास और स्थानीय वनस्पतियां मौजूद हों, वहां तितलियों की विविधता मिलने की संभावना अधिक होती है।

तितलियों का जीवन चक्र स्थानीय वनस्पतियों से भी जुड़ा होता है। इसलिए किसी क्षेत्र में तितलियों की कई प्रजातियों की मौजूदगी उस इलाके की वनस्पति विविधता की ओर भी संकेत कर सकती है।

Big Butterfly Month से मिला दस्तावेजीकरण को बढ़ावा

तितलियों की तस्वीरें और उनकी पहचान दर्ज करने का काम Big Butterfly Month जैसे अभियानों के दौरान और तेज हुआ। ऐसे अभियानों में प्रकृति प्रेमी अलग-अलग स्थानों पर तितलियों की तस्वीरें लेते हैं और उनकी पहचान तथा रिकॉर्ड तैयार करते हैं।

फोटोग्राफी के माध्यम से तैयार किया गया डेटा भविष्य में जैव-विविधता के अध्ययन में उपयोगी हो सकता है। खासकर ऐसे जिलों में जहां जंगल और प्राकृतिक क्षेत्र बड़े भूभाग में फैले हों, वहां स्थानीय स्तर पर बनाए गए रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अभी और प्रजातियां सामने आने की संभावना

जशपुर में तितलियों की संख्या करीब 125 तक पहुंचने के बावजूद सर्वेक्षण पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता। जिले के कई ऐसे वन और प्राकृतिक क्षेत्र हैं जहां व्यवस्थित तरीके से अभी और रिकॉर्ड तैयार किए जाने की संभावना है।

स्थानीय प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि आने वाले समय में कुछ और प्रजातियां सामने आ सकती हैं।

हालांकि किसी नई प्रजाति को रिकॉर्ड में शामिल करने के लिए उसकी वैज्ञानिक पहचान और दस्तावेजीकरण जरूरी होता है। केवल किसी तितली को देख लेना उसे नई प्रजाति साबित नहीं करता।

संरक्षण से जुड़ा बड़ा संदेश

तितलियों के संरक्षण के लिए केवल जंगल बचाना पर्याप्त नहीं माना जाता। घासभूमि, जलस्रोत, स्थानीय पौधे और उन वनस्पतियों को भी सुरक्षित रखना जरूरी है जिन पर तितलियां निर्भर करती हैं।

जशपुर में तितलियों की (Jashpur Butterfly Diversity) बढ़ती रिकॉर्ड संख्या जिले के प्राकृतिक संसाधनों की एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने रखती है। यह आंकड़ा पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षण पैदा कर सकता है।

यदि प्रकृति आधारित पर्यटन को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जाए तो स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ सकती है।

जशपुर की तितलियां इसलिए खास हैं क्योंकि वे केवल रंग-बिरंगी प्राकृतिक सुंदरता का हिस्सा नहीं हैं। उनके रिकॉर्ड से जिले के जंगलों और जैव-विविधता की एक अलग तस्वीर सामने आती है। करीब 125 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है और भविष्य में विस्तृत सर्वे से यह संख्या और बढ़ सकती है।

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