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Raipur 3D Property Mapping: रायपुर में अब घर-दुकान की होगी 3D मैपिंग, हर प्रॉपर्टी को मिलेगी यूनिक GIS ID

रायपुर शहर में संपत्तियों के रिकॉर्ड और मूल्यांकन (Raipur 3D Property Mapping) को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में नगर निगम एक नई तकनीकी व्यवस्था की तैयारी कर रहा है। शहर की प्रॉपर्टी का री-असेसमेंट कराने के लिए LiDAR सर्वे प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया के तहत संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग की जाएगी और प्रत्येक संपत्ति को एक यूनिक GIS ID दिए जाने की योजना है।

नगर निगम की यह पहल शहर की संपत्तियों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड को तकनीक के माध्यम से अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश मानी जा रही है। खास बात यह है कि सर्वे के लिए ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में चार एजेंसियों ने रुचि दिखाई है।

LiDAR सर्वे से क्या बदलेगा? Raipur 3D Property Mapping

LiDAR यानी Light Detection and Ranging एक ऐसी तकनीक है जिसमें सेंसर और लेजर आधारित प्रणाली के माध्यम से किसी क्षेत्र की संरचना और भौगोलिक जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।

शहर की संपत्तियों के सर्वे में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल होने पर मकान, व्यावसायिक भवन और अन्य निर्मित संरचनाओं से संबंधित डेटा को डिजिटल प्रारूप में व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

रायपुर जैसे तेजी से फैलते शहर में संपत्तियों का पुराना रिकॉर्ड बनाए रखना नगर निगम के लिए लगातार चुनौती रहा है। शहर का विस्तार होने के साथ नई कॉलोनियां, मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामने आते हैं। ऐसे में डिजिटल मैपिंग से संपत्तियों की पहचान और रिकॉर्ड को अपडेट करने में सहायता मिल सकती है।

हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक GIS पहचान

इस योजना का एक अहम हिस्सा यूनिक GIS ID है। GIS यानी Geographic Information System के जरिए किसी संपत्ति की जानकारी को उसके भौगोलिक स्थान से जोड़ा जा सकता है।

यदि किसी संपत्ति को यूनिक पहचान मिलती है तो भविष्य में नगर निगम के रिकॉर्ड में उसे ढूंढना और उससे जुड़ी जानकारी अपडेट करना आसान हो सकता है।

संपत्ति कर, भवन संबंधी रिकॉर्ड (Raipur 3D Property Mapping) और शहर की योजना बनाने जैसे कार्यों में भी ऐसे डिजिटल डेटाबेस का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ व्यवस्था लागू होने और डेटा की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।

चार एजेंसियों ने दिखाई रुचि

नगर निगम की ओर से कराए जाने वाले सर्वे के लिए ऑनलाइन टेंडर जारी किया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक चार एजेंसियों ने इसमें रुचि दिखाई है।

अब आगे की प्रक्रिया में तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद संबंधित एजेंसी के चयन और सर्वे की वास्तविक शुरुआत की दिशा में कदम बढ़ सकता है।

टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सर्वे किस एजेंसी को दिया जाता है और इसका पूरा दायरा क्या होगा।

संपत्ति मालिकों के लिए क्या मायने?

संपत्ति की डिजिटल मैपिंग का सबसे सीधा असर नगर निगम और संपत्ति रिकॉर्ड (Raipur 3D Property Mapping) की व्यवस्था पर पड़ेगा। भविष्य में किसी संपत्ति से संबंधित जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ना आसान हो सकता है।

हालांकि संपत्ति मालिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि GIS ID अपने आप में स्वामित्व प्रमाणपत्र नहीं होती। यह मुख्य रूप से किसी संपत्ति की भौगोलिक पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन की तकनीकी व्यवस्था का हिस्सा होगी।

सर्वे के दौरान संपत्ति मालिकों से किस प्रकार की जानकारी ली जाएगी और डेटा का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत होगा, यह संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगा।

रायपुर के शहरी प्रबंधन में तकनीक की भूमिका

रायपुर लगातार विस्तार कर रहा है। ऐसे में नगर निगम के लिए सटीक और अपडेटेड प्रॉपर्टी डेटा महत्वपूर्ण हो जाता है। सड़क, नाली, जलापूर्ति, संपत्ति कर और शहरी विकास जैसी योजनाओं के लिए सही भौगोलिक जानकारी उपयोगी हो सकती है।

3D मैपिंग और GIS आधारित रिकॉर्ड व्यवस्था इसी दिशा में एक तकनीकी कदम है।

अब आगे देखने वाली बात यह होगी कि टेंडर प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और शहर में सर्वे कब शुरू होता है। यदि योजना निर्धारित तरीके से लागू होती है तो रायपुर के संपत्ति रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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