Diesel Limit for Farmers: 200 लीटर डीजल की नई सीमा से गुड़ली के किसान परेशान, खेती-किसानी पर मंडराया संकट

सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल वितरण को लेकर जारी की गई नई गाइडलाइन अब किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। इस नए नियम के तहत पेट्रोल पंपों से 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिए जाने का प्रावधान है। इस पाबंदी के कारण गुड़ली क्षेत्र के किसान खासे परेशान हैं। खेती-किसानी के भारी-भरकम कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत होती है, लेकिन तय सीमा से अधिक ईंधन न मिलने के कारण अब कृषि कार्य प्रभावित होने की प्रबल आशंका बढ़ गई है।
ड्रम लेकर पंप पहुंच रहे किसान, मिल रही निराशा
गुड़ली और आसपास के क्षेत्र के किसान अपने ट्रैक्टर, विभिन्न कृषि उपकरणों और सिंचाई कार्यों के लिए बड़े-बड़े ड्रम लेकर पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं। लेकिन पेट्रोल पंप संचालक नई सरकारी गाइडलाइन का हवाला देते हुए उन्हें 200 लीटर से अधिक डीजल देने से साफ मना कर रहे हैं।
किसानों की मुख्य समस्याएं इस प्रकार हैं:
- समय और धन की बर्बादी: एक बार में पर्याप्त डीजल न मिलने के कारण किसानों को बार-बार पेट्रोल पंप के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका कीमती समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
- खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित: वर्तमान में खरीफ सीजन चल रहा है। खेतों की जुताई, तैयारी, बुवाई और सिंचाई के लिए किसानों को लगातार और भारी मात्रा में डीजल की आवश्यकता होती है। ईंधन की कमी से ये सभी काम रुक रहे हैं।
पेट्रोल पंप संचालकों की मजबूरी
इस पूरे मामले में पेट्रोल पंप संचालकों का अपना अलग तर्क है। उनका कहना है कि वे केवल सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों और गाइडलाइंस की अक्षरशः पालना कर रहे हैं। यदि वे 200 लीटर से ज्यादा डीजल किसी को देते हैं, तो नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
किसानों की मांग: कृषि कार्यों के लिए दी जाए छूट
किसानों का प्रशासन और सरकार से स्पष्ट आग्रह है कि कृषि और किसानी को देखते हुए इस नियम में तत्काल प्रभाव से ढील दी जाए। यदि बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में पर्याप्त डीजल उपलब्ध नहीं हुआ, तो फसल चक्र पिछड़ जाएगा और अंततः इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।






