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Jharkhand News: JPSC-JSSC की परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर हाई कोर्ट की रोक, हेमंत सोरेन सरकार को लगा बड़ा झटका

Jharkhand News: JPSC-JSSC: झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी पचड़े में फंस गया है। राज्य भर में छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद परीक्षाओं को रद्द करने के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की सरकार के फैसले पर झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) ने रोक (Stay) लगा दी है।

इस फैसले से जहां परीक्षा रद्द करवाने के लिए आंदोलन कर रहे छात्रों को करारा झटका लगा है, वहीं उन सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जिनकी नौकरी इस सरकारी आदेश के बाद खतरे में पड़ गई थी।

खबर की मुख्य बातें (Jharkhand News)

  • हाई कोर्ट का स्टे: सरकार के 18 अगस्त 2026 के परीक्षा रद्द करने वाले आदेश पर रोक।
  • सरकार से जवाब तलब: कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 15 सितंबर को।
  • सफल अभ्यर्थियों को राहत: 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के 342 सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द होने से बची।
  • विवाद की वजह: पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों के बाद सरकार ने रद्द की थीं 22 परीक्षाएं।

तीन अलग-अलग याचिकाओं पर हुई सुनवाई

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले से जुड़ी तीन अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। अदालत ने सरकार की ओर से 18 अगस्त को जारी अधिसूचना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर 2026 को होगी।

किन याचिकाओं पर हुई सुनवाई?

  1. दीपमाला एवं अन्य: इन्होंने 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (विज्ञापन संख्या 01/2024) रद्द करने के आदेश को चुनौती दी।
  2. सोनम कुमारी: इन्होंने भी 11वीं-13वीं JPSC परीक्षा रद्द करने के खिलाफ याचिका दायर की।
  3. सौरव सिंह एवं अन्य: इन्होंने जेपीएससी द्वारा आयोजित फूड सेफ्टी अफसर परीक्षा (विज्ञापन संख्या 18/2023) के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

क्या थी याचिकाकर्ता सोनम कुमारी की दलील?

11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा की सफल अभ्यर्थी सोनम कुमारी ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया कि:

  • इस सरकारी नौकरी के लिए उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी थी।
  • उन्हें 24 नवंबर 2025 को विधिवत नियुक्ति पत्र मिल चुका था और उन्होंने अपनी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली थी।
  • इसके बावजूद, 18 अगस्त 2026 को सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अचानक उनकी नियुक्ति रद्द कर दी। बता दें कि इस परीक्षा में कुल 342 अभ्यर्थी सफल हुए थे और वे अलग-अलग पदों पर नियुक्त होकर अपनी सेवाएं दे रहे थे।

हेमंत सोरेन सरकार ने क्यों लिया था परीक्षा रद्द करने का फैसला?

राज्य में भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही कथित गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर छात्र पिछले 25 दिनों से सड़कों पर जोरदार आंदोलन कर रहे थे। इसी दबाव के बीच मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया:

  • 22 परीक्षाएं रद्द: जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) समेत कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। (इनमें से 19 परीक्षाएं टीडीपीएल (TDPL) एजेंसी के जरिए आयोजित हुई थीं)।
  • CID जांच का आदेश: साल 2014 से अब तक JPSC और JSSC के जरिए हुई 17 परीक्षाओं, उनके परिणामों और नियुक्तियों की जांच सीआईडी (CID) को सौंप दी गई।
  • 6 परीक्षाएं स्थगित: विवादों को देखते हुए आगामी 6 परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया।

अब हाई कोर्ट के इस स्टे के बाद राज्य में नियुक्तियों और रद्द की गई परीक्षाओं को लेकर स्थिति फिर से उलझ गई है। सभी की नजरें अब 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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