Durg Semaria Road Crisis: 1563 से अधिक गड्ढे, बारिश में अंतिम यात्रा भी बनी मुश्किल
दुर्ग जिले के सेमरिया गांव में खराब सड़क और बरसाती जलभराव की समस्या फिर चर्चा में आई। मीडिया रिपोर्ट में गांव की उस स्थिति का जिक्र है, जहां अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने तक में लोगों को कीचड़, गड्ढों और पानी से भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि बरसात में मुख्य सड़क से लेकर श्मशान घाट तक पहुंचना जोखिम भरा हो जाता है। इसका असर अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, राशन और रोजी-रोटी के लिए होने वाली रोजमर्रा की आवाजाही पर भी पड़ रहा है।
सेमरिया में अंतिम यात्रा क्यों बनी बड़ी चुनौती
हाल की एक अंतिम यात्रा के दौरान करीब 30 से 40 ग्रामीणों को बारी-बारी से अर्थी उठाकर आगे बढ़ना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे कठिन हिस्सा श्मशान घाट से पहले का करीब 1.5 किलोमीटर का रास्ता था, जो बारिश के बाद दलदली हो गया था। कई जगह पानी इतना भर गया कि पैदल चलने वालों को घुटने से ऊपर तक पानी और कीचड़ का सामना करना पड़ा। श्मशान परिसर में भी जलभराव की स्थिति बताई गई है।
अंतिम संस्कार जैसी अनिवार्य व्यवस्था के लिए सुरक्षित पहुंच मार्ग न होना ग्रामीणों की बड़ी चिंता है। बारिश के दौरान रास्ता खराब होने पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए साथ चलना भी मुश्किल हो जाता है। किसी आकस्मिक स्थिति में यही रास्ता एंबुलेंस या दूसरे वाहन के लिए भी बाधा बन सकता है।
श्मशान तक आखिरी 1.5 किलोमीटर सबसे कठिन
सेमरिया, दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड में बागडूमर ग्राम पंचायत से जुड़ा गांव है। जिला दुर्ग की आधिकारिक वेबसाइट के ग्राम एवं पंचायत रिकॉर्ड में भी सेमरिया को बागडूमर ग्राम पंचायत के अंतर्गत दर्ज किया गया है। गांव की आबादी करीब 500 बताई गई है। रायपुर से दूरी करीब 40 किलोमीटर और भिलाई से लगभग 20 किलोमीटर होने के बावजूद स्थानीय बुनियादी ढांचे की स्थिति पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।
Durg Semaria Road Crisis: तीन किलोमीटर सड़क पर 1563 से ज्यादा गड्ढे
सेमरिया को बागडूमर और अहिवारा की ओर जोड़ने वाली सड़क की लंबाई करीब 3 से 4 किलोमीटर बताई गई है। ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क लगभग 2012 में बनी थी। हाल के एक ग्राउंड चेक में इस हिस्से पर 1563 से अधिक गड्ढे गिने गए। बरसात में इनमें पानी भरने से सड़क की वास्तविक सतह पहचानना कठिन हो जाता है। इस संख्या और सड़क की स्थिति की रिपोर्टिंग NDTV ने भी 31 अगस्त को की थी।
यही मार्ग छात्रों, मजदूरों, मरीजों और राशन लेने जाने वाले परिवारों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। मोटरसाइकिल और साइकिल सवारों के फिसलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। सड़क की स्थिति यात्रा का समय बढ़ाने के साथ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और विद्यार्थियों की नियमित आवाजाही को प्रभावित करती है।
सड़क के साथ पानी और बिजली की शिकायतें भी
ग्रामीणों ने सड़क के अलावा पेयजल और बिजली व्यवस्था को लेकर भी समस्याएं बताई हैं। गांव में पानी की टंकी और पाइपलाइन होने के बावजूद लीकेज तथा गंदा पानी आने की शिकायत सामने आई है। कुछ हैंडपंपों के काम न करने की बात भी कही गई है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जलापूर्ति पर अतिरिक्त असर पड़ता है।
स्थानीय स्कूल भवन और कीचड़ भरी गलियों की स्थिति भी चिंता का विषय बताई गई है। इसलिए सेमरिया का मुद्दा केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है। सड़क, पेयजल, बिजली और सुरक्षित सार्वजनिक परिसर यहां आपस में जुड़े बुनियादी सवाल हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने क्या कहा
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार मुख्य सड़क का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। श्मशान घाट की ओर जाने वाले मार्ग के संबंध में इंजीनियरों को सर्वे कर इसे ग्रामीण सड़क नेटवर्क में शामिल करने की संभावना देखने के निर्देश दिए गए हैं। दुर्ग सांसद विजय बघेल ने सड़क को प्राथमिकता से बनवाने और बारिश के बाद गड्ढों की मरम्मत कराने की बात कही है।
अब नजर स्वीकृति, तकनीकी सर्वे, बजट और काम शुरू होने की समय-सीमा पर रहेगी। स्थायी सड़क बनने तक जलनिकासी, खतरनाक गड्ढों की पहचान, अस्थायी भराव और श्मशान मार्ग को चलने योग्य बनाने जैसे तात्कालिक उपाय भी जरूरी होंगे।






