छत्तीसगढ़ में डीप डिप्रेशन का असर, बस्तर के पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम तंत्र के कारण छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में अगले 48 घंटे बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना जताई गई है। 23 सितंबर की सुबह जारी मौसम अपडेट के अनुसार दक्षिण छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग के जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवा का जोखिम बना हुआ है। सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव के लिए अधिक सतर्कता की जरूरत बताई गई है।
बंगाल की खाड़ी में मजबूत हुआ सिस्टम
मौसम तंत्र पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा था। पूर्वानुमान में इसके डीप डिप्रेशन के रूप में दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की तरफ बढ़ने की संभावना जताई गई। इसका तटीय क्षेत्र पर असर पड़ने के साथ छत्तीसगढ़ में नमी की आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे दक्षिणी और मध्य हिस्सों में बारिश की तीव्रता बढ़ने की स्थिति बनती है।
मौसम विज्ञान की भाषा में डिप्रेशन सामान्य कम दबाव के क्षेत्र से ज्यादा संगठित प्रणाली होती है। इसका अर्थ हर जगह एक जैसी बारिश नहीं होता। किसी जिले में तेज बारिश हो सकती है तो दूसरे इलाके में बादल और छिटपुट वर्षा तक असर सीमित रह सकता है।
बस्तर संभाग पर ज्यादा असर का अनुमान
सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव के लिए भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवा की आशंका प्रमुख रूप से बताई गई है। कुछ स्थानों पर हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। तेज हवा और लगातार बारिश की स्थिति में पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति प्रभावित होने, कच्चे मकानों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान तथा निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा बढ़ सकता है।
रायपुर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, दुर्ग, बेमेतरा, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, नारायणपुर और कांकेर समेत कई जिलों में भी गरज-चमक और वर्षा की गतिविधि रहने का अनुमान रिपोर्ट में दिया गया है।
रायपुर में बादल और बौछारों की संभावना
राजधानी रायपुर में दिन के दौरान बादल छाए रहने और कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का अनुमान है। मौसम अपडेट के अनुसार अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। हालांकि स्थानीय बादल बनने के कारण वास्तविक वर्षा एक मोहल्ले से दूसरे इलाके तक अलग हो सकती है।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी तापमान पर बादलों और वर्षा का असर दिखाई दे सकता है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में लगातार बादल और बारिश की वजह से दिन का तापमान अपेक्षाकृत कम रहने की स्थिति बनी हुई है।
किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह सिस्टम?
सितंबर के अंतिम हिस्से की तेज बारिश खरीफ फसलों पर मिश्रित असर डाल सकती है। जहां धान के खेतों में पानी की जरूरत है वहां नियंत्रित बारिश लाभकारी हो सकती है, लेकिन लगातार भारी वर्षा से खेतों में जलभराव, निचली जमीन में फसल डूबने या तेज हवा से खड़ी फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है।
किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जिला स्तर के ताजा पूर्वानुमान को देखना है। केवल राज्य स्तरीय अलर्ट के आधार पर खेत संबंधी फैसला नहीं करना चाहिए, क्योंकि वर्षा का वितरण बहुत स्थानीय हो सकता है।
बिजली गिरने के समय खुले क्षेत्र से बचें
गरज-चमक वाले मौसम में सबसे गंभीर जोखिम वज्रपात का रहता है। खेत, खुले मैदान, ऊंचे पेड़ के नीचे, जलाशय या खुले वाहन वाले क्षेत्र जोखिम बढ़ा सकते हैं। तेज बारिश के दौरान नदी-नालों, पुल-पुलियों और डूबान वाले रास्तों पर पानी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।
यात्रियों को विशेष रूप से रात के समय ऐसे मार्गों पर सावधानी रखने की जरूरत है जहां पहले से जलभराव या पुल क्षतिग्रस्त होने की सूचना हो।






