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Chhattisgarh UCC: शीतकालीन सत्र में लागू होगा समान नागरिक संहिता, जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में कमेटी गठित

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी Chhattisgarh UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस कदम उठा लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि आने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यूसीसी छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए पाँच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन भी कर दिया है।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने क्या कहा, Chhattisgarh UCC

डिप्टी सीएम अरुण साव ने Chhattisgarh UCC पर कहा कि यह समय की आवश्यकता है और पहले से कई राज्यों में इसे लागू किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कमेटी गठित की है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साव ने कांग्रेस के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि यूसीसी में किसी का कोई नुकसान नहीं है और विपक्ष महज मुद्दा खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।

पाँच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन

सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 जून को आदेश जारी कर यूसीसी की स्टडी, सुझाव और ड्राफ्ट तैयार करने के लिए पाँच सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। कमेटी में शत्रुघ्न सिंह, मोहन पवार, एमके राउत और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है।

कमेटी क्या करेगी काम

कमेटी का मुख्य काम राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करना होगा। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, दत्तक ग्रहण और अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। समिति नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विधि विशेषज्ञों से भी सुझाव लेगी। जहाँ यूसीसी पहले से लागू है उन राज्यों की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।

यूसीसी लागू होने पर क्या बदलेगा

छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू होने के बाद राज्य के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति और समुदाय से परे एक समान कानून लागू होगा। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लोग विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में अपने-अपने धार्मिक या पर्सनल लॉ का पालन करते हैं। सरकार का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग पर्सनल लॉ के चलते होने वाले भेदभाव को खत्म करना और महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिलाना है।

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