DJ Ban Chhattisgarh: कानफोड़ू डीजे वालों की अब खैर नहीं! आ गया ‘कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026’, पकड़े गए तो होगी जेल, नीलाम हो जाएगा डीजे

छत्तीसगढ़ में तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर और कान के पर्दे फाड़ देने वाले डीजे (DJ Ban Chhattisgarh) के शोर से परेशान आम जनता को जल्द ही एक बड़ी राहत मिलने जा रही है। ध्वनि प्रदूषण को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट की कड़ी फटकार और सख्ती के बाद, राज्य सरकार एक्शन मोड में आ गई है।
सरकार ने ध्वनि प्रदूषण पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए ‘कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026’ का नया और बेहद सख्त ड्राफ्ट (प्रारूप) तैयार कर लिया है। इस नए कानून के लागू होने के बाद बिना अनुमति डीजे बजाना और तय समय सीमा का उल्लंघन करना भारी पड़ सकता है।
बिना अनुमति नहीं बजेगा डीजे, साइलेंट ज़ोन भी तय
नए प्रावधानों के तहत अब प्रदेश में किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम, शादी या जुलूस में ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर) या डीजे बजाने से पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM), पुलिस कमिश्नर या सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान (स्कूल-कॉलेज), छात्रावास, न्यायालय और सरकारी कार्यालयों के 100 मीटर के दायरे को पूर्ण रूप से ‘साइलेंट ज़ोन’ घोषित किया गया है। यहां किसी भी स्थिति में शोर-शराबे की इजाजत नहीं होगी।
रात 10 बजे के बाद सख्त पाबंदी
नियमों में समय सीमा को स्पष्ट रूप से बांट दिया गया है। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक को ‘दिन का समय’ माना जाएगा, जबकि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ‘रात्रि का समय’ होगा। रात 10 बजे के बाद किसी भी तरह के डीजे या लाउडस्पीकर के संचालन पर पूर्ण और सख्त प्रतिबंध लागू रहेगा।
नियम तोड़े तो क्या होगी सजा?
नए अधिनियम में सजा और जुर्माने के प्रावधान इतने कड़े हैं कि डीजे संचालकों को नियम तोड़ने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा:
- पहली बार पकड़े जाने पर: कुछ महीनों की जेल या न्यूनतम 50,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। अगर यही गलती ‘साइलेंट ज़ोन’ में की गई, तो सजा 1 साल तक और जुर्माना 75,000 रुपये तक हो सकता है।
- दोबारा अपराध करने पर: अगर कोई दूसरी बार नियम तोड़ता है, तो उसे 3 महीने से लेकर 1 साल तक की कैद और न्यूनतम 1 लाख रुपये का जुर्माना भुगतना होगा। साइलेंट ज़ोन में दूसरी बार पकड़े जाने पर 6 महीने से 2 वर्ष तक की जेल और 1.5 लाख रुपये का तगड़ा जुर्माना लगाया जाएगा।
रद्द होगा लाइसेंस, उपकरणों की होगी नीलामी
सरकार केवल जुर्माने तक सीमित नहीं रहने वाली है। अगर कोई डीजे संचालक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसका पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, पुलिस द्वारा जब्त किए गए डीजे उपकरणों को वापस नहीं किया जाएगा, बल्कि सीधे उनकी नीलामी कर दी जाएगी।
5 अक्टूबर तक मांगी गई हैं आपत्तियां
गृह एवं पुलिस विभाग ने ‘कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026’ के इस प्रस्तावित विधेयक को सार्वजनिक कर दिया है। आम जनता और कानून के जानकारों से इस ड्राफ्ट पर 5 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इस प्रक्रिया के पूरी होते ही इसे पूरे प्रदेश में एक कड़े कानून के रूप में लागू कर दिया जाएगा। इस सख्त कदम से प्रदेशवासियों को ध्वनि प्रदूषण के इस रोजमर्रा के तनाव से स्थायी निजात मिलने की पूरी उम्मीद है।






