Chhattisgarh Sports Conclave 2026: 100 करोड़ का खेल मिशन, नई खेल नीति का रोडमैप तैयार

रायपुर। Chhattisgarh Sports Conclave 2026 के जरिए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रायपुर में 28 जुलाई 2026 को आयोजित राज्य के पहले स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में देशभर के खेल प्रशासक, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट, प्रशिक्षक, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, खेल संघों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी एक मंच पर जुटे। दिनभर चली चर्चा का केंद्र केवल बड़े स्टेडियम बनाना नहीं, बल्कि गांव और स्कूल स्तर से प्रतिभा पहचानकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने की व्यवस्थित योजना तैयार करना रहा।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित कॉन्क्लेव का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री और खेल मंत्री अरुण साव ने किया, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समापन सत्र में शामिल हुए। रायपुर के कोर्टयार्ड बाय मैरियट में हुए कार्यक्रम को सात तकनीकी सत्रों में बांटा गया था। इनमें प्रशिक्षण व्यवस्था, खिलाड़ियों की क्षमता वृद्धि, स्पोर्ट्स साइंस, हाई परफॉर्मेंस सिस्टम, खेल परिसरों के संचालन, बेहतर सुविधाओं और खेल अधोसंरचना के प्रभावी उपयोग पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए।
नई खेल नीति में शामिल होंगे सुझाव
इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नई राज्य खेल नीति से जुड़ा है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार के अनुसार, कॉन्क्लेव से मिले व्यावहारिक सुझावों को प्रस्तावित नई खेल नीति में शामिल किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि 28 जुलाई की बैठक में खेल नीति लागू नहीं हुई है, बल्कि उसके लिए रोडमैप और सिफारिशें तैयार की गई हैं। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें प्रतिभा की पहचान प्राथमिक स्कूल स्तर से हो और खिलाड़ी को प्रशिक्षण, पोषण, प्रतियोगिता तथा विशेषज्ञ सहायता की लगातार सुविधा मिले।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समापन सत्र में बताया कि चालू वित्त वर्ष के बजट में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत खेल अधोसंरचना और प्रतिभाओं के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दूसरी ओर, विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न खेल अधोसंरचना परियोजनाओं पर काम चल रहा है। दोनों आंकड़े अलग-अलग मदों को दर्शाते हैं—100 करोड़ रुपये मिशन का बजटीय प्रावधान है, जबकि 150 करोड़ रुपये से अधिक चल रही अधोसंरचना परियोजनाओं की कुल लागत बताई गई है।
156 खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार का रास्ता
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने 20 खेलों के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को मंजूरी दी है, जिससे उनके लिए सरकारी सेवा में नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है। यह फैसला उन खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो पदक जीतने के बाद भी स्थायी रोजगार और आर्थिक सुरक्षा की चिंता से जूझते हैं। कॉन्क्लेव के दौरान खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।
सरकार ने बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स को राज्य में प्रतिभा खोजने के बड़े मंच के रूप में पेश किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक बस्तर ओलंपिक में लगभग चार लाख और सरगुजा ओलंपिक में करीब साढ़े तीन लाख प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इन आयोजनों से यह संकेत मिला कि दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें नियमित प्रशिक्षण, अच्छे मैदान, योग्य प्रशिक्षक और प्रतियोगिताओं की जरूरत है।
खिलाड़ियों ने बताई जमीनी जरूरत
अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ महिला टीम की कप्तान किरण पिस्दा ने कहा कि बड़े खेल आयोजनों ने स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान दी है। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी, तैराक अनुष्का भगत, एथलीट लकी मरकाम, पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर राजेश चौहान और ओलंपियन जिन्शन जॉनसन सहित कई खिलाड़ी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
अब असली परीक्षा सुझावों को जिलों तक पहुंचाने की है। कॉन्क्लेव की सफलता केवल नई नीति के दस्तावेज से तय नहीं होगी। इसका पैमाना यह होगा कि गांव के खिलाड़ी को समय पर मैदान, प्रशिक्षक, डाइट, उपकरण, चिकित्सा सुविधा और प्रतियोगिता का अवसर मिलता है या नहीं।
फिलहाल सरकार ने रोडमैप बनाने, बजट उपलब्ध कराने और प्रतिभाओं को रोजगार से जोड़ने का संकेत दिया है। आने वाले महीनों में नई खेल नीति का अंतिम प्रारूप और उसके क्रियान्वयन की समयसीमा इस पहल की वास्तविक दिशा स्पष्ट करेगी।






