CG EOW Furniture Scam:अंबिकापुर ‘फर्नीचर घोटाले’ में EOW का शिकंजा: 10 साल बाद 10 आरोपियों पर 20,000 पन्नों का चालान, 67 लाख के गबन का खुलासा

CG EOW Furniture Scam: छत्तीसगढ़ में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शिक्षा विभाग से जुड़े एक बड़े घोटाले में अहम कार्रवाई की है। EOW ने अविभाजित सरगुजा जिले के बहुचर्चित ‘राजीव गांधी शिक्षा मिशन फर्नीचर घोटाले’ (Rajiv Gandhi Shiksha Mission Scam) में लगभग 10 साल लंबी जांच के बाद, आज 10 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अंबिकापुर में 20,000 पन्नों का भारी-भरकम चालान (Challan) पेश कर दिया है।
इस घोटाले से राज्य सरकार को करीब 67 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई थी। नियमों को ताक पर रखकर बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के ही ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया था।
क्या है 2.70 करोड़ का ‘फर्नीचर घोटाला’?(CG EOW Furniture Scam)
यह पूरा मामला वर्ष 2010-11 का है। सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan) के तहत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में बच्चों के लिए फर्नीचर खरीदने हेतु 2.70 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था।
- नियमों की अनदेखी: जिला कार्यालय (राजीव गांधी शिक्षा मिशन) ने 10 फर्मों को फर्नीचर सप्लाई के ऑर्डर दिए। शर्त थी कि 20 दिनों के अंदर स्कूलों में फर्नीचर पहुंच जाना चाहिए।
- सप्लाई से पहले ही बंटे चेक: कलेक्टर का साफ निर्देश था कि स्कूलों में फर्नीचर पहुंचने और उसके ‘भौतिक सत्यापन’ के बाद ही भुगतान किया जाए। लेकिन तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एस.पी. पाण्डेय (S.P. Pandey) ने पद का दुरुपयोग करते हुए सप्लाई से पहले ही (अप्रैल 2011 में) फर्मों को चेक बांट दिए।
जांच में सामने आई गबन और फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
जब समाचार पत्रों में इस भ्रष्टाचार की शिकायतें छपीं, तो 2013 में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति और बाद में EOW की जांच (अपराध क्रमांक 28/2017) में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए:
- फर्जी बैंक खाते और 7 लाख का कमीशन: एस.पी. पाण्डेय ने एक वैध फर्म (दर्शन फेब्रिकेटर) के नाम का क्रय आदेश अपने एक करीबी संजय पटेल (आकृति प्रिंटिंग प्रेस) को दे दिया। संजय ने उसी नाम से फर्जी बैंक खाता खोला और करीब 22 लाख रुपये निकाल लिए। पूछताछ में संजय ने बताया कि उसने पाण्डेय को 7 लाख रुपये कमीशन (رشوت) दिया था, लेकिन किसी भी स्कूल में एक भी फर्नीचर सप्लाई नहीं किया।
- बिना सप्लाई किए भुगतान: इसी तरह एक अन्य फर्म ‘महारानी स्टील’ को भी 11 लाख से ज्यादा का भुगतान किया गया, लेकिन उसने भी कोई फर्नीचर नहीं दिया। बाकी की 8 फर्मों ने ऑर्डर से बहुत कम फर्नीचर सप्लाई किया।
कुल मिलाकर इस पूरे खेल में 67,48,008 रुपये का सीधा गबन प्रमाणित हुआ है।
10 आरोपियों की लिस्ट: किन-किन पर गिरी गाज?
EOW ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 120-B, 409, 420 के तहत चालान पेश किया है। मुख्य आरोपी पूर्व अफसर सहित कुल 10 लोग इसमें शामिल हैं:
- सत्यप्रकाश पाण्डेय (S.P. Pandey): तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक (वर्तमान में सेवानिवृत्त)।
- संजय पटेल: दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से फर्जी बैंक खाता खोलने वाला संचालक।
- अजय कुमार अग्रवाल (अम्बिका अलमीरा एण्ड स्टील फेब्रिकेटर्स)
- ममता अग्रवाल (सेलेनो स्टील)
- बिधी सिंह कटलारिया (महामाया फेब्रिकेटर्स)
- राजकुमार बंसल (सूर्या स्टील एण्ड वुडन इंडस्ट्रीज)
- संदीप तिवारी (श्री साई इंडस्ट्रीज)
- हितेश कुमार अग्रवाल (श्याम मेटल प्रोडक्ट्स)
- रितेश कुमार अग्रवाल (श्री श्याम इंडस्ट्रीज)
- संजीव गुप्ता (पंकज फर्नीचर मार्ट)
(नोट: एक अन्य आरोपी प्रेमचन्द जैन, महारानी स्टील की 2025 में मृत्यु हो चुकी है)
सहयोग नहीं करने पर हुई गिरफ्तारी
जांच के दौरान तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन दोनों ने EOW की जांच में कोई सहयोग नहीं किया। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार (Arrest) कर न्यायिक हिरासत (Jail) में भेज दिया गया था। अब चालान पेश होने के बाद कोर्ट में इस मामले की विधिवत सुनवाई शुरू होगी।






