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भूटान में ग्लेशियल झील फटी, उत्तर बंगाल में 10 हजार से ज्यादा लोग सुरक्षित जगहों पर भेजे गए, संकोश नदी पर रेड अलर्ट

भूटान में एक ग्लेशियल झील के फटने के बाद पश्चिम बंगाल के उत्तरी इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। अलीपुरद्वार जिले में 10 हजार से ज्यादा लोगों को शेल्टर और सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन ने संकोश नदी तंत्र पर रेड अलर्ट जारी किया है।

गासा जिले की शिंताफू झील से निकला पानी

यह घटना भूटान के गासा जिले में लेमथांग इलाके की शिंताफू झील में हुई। झील टूटने के बाद पानी मो छू नदी के रास्ते तेजी से नीचे की ओर बढ़ा, जो आगे संकोश नदी में मिलती है। संकोश नदी भारत-भूटान सीमा के साथ बहती है और आगे असम में ब्रह्मपुत्र से मिलती है।

अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, करीब 74 लाख घन मीटर पानी झील से निकलकर मो नदी में पहुंचा। अंदेशा है कि यह पानी छह से आठ घंटे में भारत-भूटान सीमा तक पहुंच सकता है। भूटान में प्रभावित इलाके को पानी पहुंचने से पहले ही खाली करा लिया गया था।

बंगाल और असम में अलर्ट

पश्चिम बंगाल सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय कर दिया है। दार्जिलिंग की पहाड़ियों, तराई और डुआर्स इलाके में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर ऊंची जगहों पर जाने की सलाह दी गई है। अलीपुरद्वार के अलावा कूचबिहार और संकोश नदी तंत्र से जुड़े दूसरे इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है।

अलीपुरद्वार में लोग आदेश मिलने के बाद अपने मवेशियों के साथ घर छोड़ते दिखे। रेस्क्यू टीमें और सिविल डिफेंस के जवान मौके पर तैनात हैं। कई स्कूलों को अस्थायी राहत शिविर बनाया गया है। असम के निचले इलाकों के लिए भी चेतावनी जारी हुई है।

भूटान के अधिकारियों से लगातार संपर्क

उत्तर बंगाल प्रशासन भूटान के अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर पानी के बहाव और उसकी ताकत पर नजर रख रहा है। पुलिस का कहना है कि स्थिति काबू में है, लेकिन रेड अलर्ट फिलहाल जारी रहेगा।

गौरतलब है कि देश के पूर्वी हिस्से पहले से ही चक्रवात अर्नब की मार झेल रहे हैं। ग्लेशियल झील फटने यानी GLOF की घटनाएं हिमालयी इलाकों में बड़ा खतरा मानी जाती हैं। अक्टूबर 2023 में सिक्किम की दक्षिण ल्होनक झील फटने से तीस्ता नदी में भारी तबाही हुई थी।

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