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NSE IPO: खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होगा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज; जानें क्यों BSE पर होगी ट्रेडिंग?

NSE IPO: शेयर बाजार (Share Market) के निवेशकों के लिए एक बेहद अहम खबर है। लंबे समय से बहुप्रतीक्षित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE IPO) का इंतजार अब खत्म होने वाला है और इसकी लिस्टिंग की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

हाल ही में NSE के एमडी (MD) और सीईओ (CEO) आशीष चौहान (Ashish Chauhan) ने एक बड़ा अपडेट देते हुए स्पष्ट किया है कि एक्सचेंज ने अपने शेयरों को एनएसई (NSE) के ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड कराने के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) को कोई आवेदन नहीं दिया है। नियमों के तहत, एनएसई की औपचारिक लिस्टिंग अब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ही होगी।

खबर की मुख्य बातें (NSE IPO)

  • BSE पर होगी लिस्टिंग: सेबी के नियमों के अनुसार कोई भी मान्यता प्राप्त एक्सचेंज खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता।
  • हितों का टकराव: बाजार की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ‘सेल्फ-सुपरविजन’ (Self-Supervision) की अनुमति नहीं है।
  • OFS होगा आईपीओ: एनएसई का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (Offer For Sale – OFS) होगा।
  • क्रॉस-लिस्टिंग का अनोखा संयोग: BSE पहले से एनएसई पर लिस्टेड है, अब एनएसई भी BSE पर लिस्ट होगा।

खुद के प्लेटफॉर्म पर क्यों लिस्ट नहीं हो सकता NSE?

शेयर बाजार के नियमों के तहत, किसी भी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज को अपने शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट करने की अनुमति नहीं होती है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ‘हितों का टकराव’ (Conflict of Interest) और बाजार की निष्पक्षता है।

  • निगरानी का संकट: किसी एक्सचेंज की मुख्य जिम्मेदारी ट्रेडिंग सिस्टम को पारदर्शी तरीके से चलाना, कारोबार की निगरानी करना और सही कीमत (Fair Price Discovery) सुनिश्चित करना होती है।
  • अगर उसी एक्सचेंज के शेयर वहीं ट्रेड होने लगें, तो वह अपने ही शेयरों की निगरानी करने की स्थिति में आ जाएगा। इससे ‘सेल्फ-सुपरविजन’ और बाजार में संभावित छेड़छाड़ को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

यही कारण है कि SEBI ने नियमों में यह साफ व्यवस्था की है कि मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज अपनी सिक्योरिटीज (Securities) किसी दूसरे मान्यता प्राप्त एक्सचेंज पर ही लिस्ट करेंगे।

‘Permitted to Trade’ की खबरों पर लगा विराम

कुछ समय पहले बाजार में यह चर्चा जोरों पर थी कि एनएसई अपने शेयरों को BSE पर लिस्ट कराने के बाद उन्हें वापस एनएसई पर ‘परमिटेड टू ट्रेड’ (Permitted to Trade) कैटेगरी में लाने की योजना बना रहा है। लेकिन आशीष चौहान के इस ताजा बयान ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है। एनएसई ने सेबी से इस दिशा में कोई इजाजत नहीं मांगी है।

आम निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं? (Impact on Investors)

प्रैक्टिकली देखा जाए तो एनएसई के शेयरों की BSE पर लिस्टिंग से निवेशकों के लिए कोई नुकसान या आईपीओ की चमक में कोई कमी नहीं आएगी। निवेशक आसानी से BSE के प्लेटफॉर्म पर एनएसई के शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे। अब असली फोकस एनएसई के वैल्युएशन (Valuation), मार्केट में उसके दबदबे, फ्यूचर ग्रोथ और आईपीओ के प्राइस बैंड (IPO Pricing) पर होगा।

पूरी तरह से OFS (ऑफर फॉर सेल) होगा यह आईपीओ

आपको बता दें कि एनएसई का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब यह है कि आईपीओ के जरिए जुटाई गई रकम कंपनी (एनएसई) के पास नई पूंजी के रूप में नहीं जाएगी, बल्कि इसमें सिर्फ मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमाएंगे।

एक दिलचस्प संयोग: भारतीय शेयर बाजार का दूसरा प्रमुख एक्सचेंज ‘BSE’ खुद एनएसई के प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड है। अब एनएसई के BSE पर लिस्ट होने के बाद, भारत के दोनों सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज एक-दूसरे के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होकर कारोबार करेंगे।

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