Share Market Next Week: कल से शुरू हो रहे हफ्ते में 5 बड़े फैक्टर तय करेंगे बाजार की चाल, जानें निफ्टी के सपोर्ट और रेजिस्टेंस

मुंबई: कल 22 जून से शुरू होने वाले कारोबारी हफ्ते में शेयर बाजार (Share Market Next Week) में काफी हलचल रहने की उम्मीद है। इस हफ्ते 26 तारीख को मुहर्रम के चलते बाजार में केवल 4 दिन ही कारोबार होगा। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और टेक्निकल फैक्टर्स इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
आइए विस्तार से समझते हैं कि अगले हफ्ते शेयर बाजार में क्या हो सकता है और निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. निफ्टी के सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स
बाजार की चाल समझने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स को जानना बेहद जरूरी है। वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख लेवल्स इस प्रकार हैं:
| लेवल्स का प्रकार | प्रमुख जोन (अंकों में) |
| सपोर्ट जोन (Support) | 23,936 | 23,870 | 23,820 | 23,466 | 23,345 | 23,320 |
| रेजिस्टेंस जोन (Resistance) | 24,140 | 24,382 | 24,450 | 24,480 | 24,535 | 24,646 |
- सपोर्ट का मतलब: वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती, इसलिए यह खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है।
- रेजिस्टेंस का मतलब: वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है (बिकवाली के कारण)। इसे पार करने पर ही आगे तेजी की उम्मीद रहती है।
बाजार की दिशा तय करने वाले 5 प्रमुख फैक्टर्स
1. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट विवाद
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के सीजफायर पर सहमति के बावजूद तनाव बरकरार है। ईरान ने शनिवार को ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ बंद करने की घोषणा की, जिसे अमेरिकी सेना ने गलत बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि समझौता न होने पर अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में टोल लगा सकता है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के डेलिगेशन के बीच शांति वार्ता जारी है, जिसके नतीजों का असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ेगा।
2. IT शेयरों में बिकवाली का दबाव
शुक्रवार को आईटी सेक्टर में भारी गिरावट देखी गई थी, जिसमें इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 7% तक टूट गए।
- गिरावट का कारण: अमेरिकी कंसल्टिंग कंपनी एक्सेंचर (Accenture) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान को 3-5% से घटाकर 3-4% कर दिया है।
- इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू अनुमान पर भी पड़ा है। टेक्निकल चार्ट पर आईटी इंडेक्स अपने मूविंग एवरेज से नीचे है। इसके लिए 27,000 अहम सपोर्ट और 28,300 रेजिस्टेंस बना हुआ है।
3. FIIs की बाजार में वापसी (विदेशी निवेशकों का निवेश)
लंबे समय तक बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) एक बार फिर भारतीय बाजार में नेट बायर्स बन गए हैं। इस हफ्ते विदेशी निवेशकों ने करीब 3,400 करोड़ रुपए का निवेश किया।
संस्थागत निवेशकों का निवेश डेटा (करोड़ रुपए में):
| कैटेगरी | लेटेस्ट | बीते 7 दिन | बीते 30 दिन |
| DII (घरेलू निवेशक) | -1,160 | 7,108 | 90,859 |
| FII/FPI (विदेशी निवेशक) | 4,859 | 3,386 | -66,779 |
4. रुपए में स्थिरता से बाजार को राहत
मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.32 के स्तर पर लगभग फ्लैट बंद हुआ। डी-रिस्क फॉरेक्स कंसलटेंसी के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सकारात्मक कदमों और मिडिल ईस्ट में तनाव थोड़ा कम होने की उम्मीद से रुपए को मजबूत सपोर्ट मिला है।
5. एक्सपर्ट्स की राय और टेक्निकल सेटअप
SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी का ब्रॉडर ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव बना हुआ है, क्योंकि यह अपने 20-दिन और 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से ऊपर ट्रेड कर रहा है।
- गिरावट पर नजर: बाजार में गिरावट आने पर 23,800-23,850 का जोन मजबूत सपोर्ट का काम करेगा। इसे टूटने पर निफ्टी 23,500 तक फिसल सकता है।
- तेजी पर नजर: ऊपर की तरफ 24,150-24,200 का स्तर पहला रेजिस्टेंस है, जिसे पार करने पर निफ्टी 24,500 तक पहुंच सकता है।
नॉलेज पार्ट: क्या है ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz)?
यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरा और बेहद रणनीतिक जलमार्ग है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देश अपने तेल निर्यात के लिए इसी अहम रूट पर निर्भर हैं। यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।






