
देश की राजधानी दिल्ली की राजनीति (National Politics) में शुक्रवार (24 अप्रैल) को एक बहुत बड़ा सियासी भूचाल आ गया। आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) यानी ‘आप’ को उसके गठन के बाद से अब तक का सबसे बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है। इन बागी सांसदों की अगुवाई कोई और नहीं, बल्कि पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक और अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाने वाले राघव चड्ढा (Raghav Chadha) कर रहे हैं। राघव चड्ढा ने अपने साथी सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का बड़ा ऐलान कर दिया है।
“निजी स्वार्थ के लिए काम कर रही है पार्टी”
शुक्रवार शाम को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी नेतृत्व पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।
- चड्ढा ने कहा कि दो-तिहाई बहुमत के साथ पार्टी के 7 सांसद आज बीजेपी का दामन थाम रहे हैं।
- उन्होंने कहा, “हमने आम आदमी पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा था। लेकिन दुर्भाग्य से, यह पार्टी अब देशहित के बजाय केवल निजी फायदे और स्वार्थ के लिए काम कर रही है।”
- राघव चड्ढा ने खुद को पार्टी का फाउंडिंग मेंबर (संस्थापक सदस्य) बताते हुए कहा कि शायद ही कोई आम आदमी पार्टी को उनसे बेहतर समझता हो।
- उन्होंने एक बेहद चुभने वाला बयान देते हुए कहा, “मुझे लगातार यह महसूस हो रहा था कि ‘I am right man in wrong party’ (मैं गलत पार्टी में सही इंसान हूं), इसलिए मैंने पार्टी से दूर होने का यह कड़ा फैसला लिया है। हम अपना करियर बनाने के लिए राजनीति में नहीं आए थे।”
पीएम मोदी के नेतृत्व पर जताया भरोसा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व की जमकर तारीफ की।
- राघव चड्ढा ने कहा, “पिछले 12 सालों में भाजपा की केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई ऐसे साहसिक और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जो आज से पहले कई बड़े नेता लेने से भी डरते थे।”
- उन्होंने आगे कहा कि देश की जनता ने पीएम मोदी के इस मजबूत नेतृत्व पर एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे तीन बार अपनी पक्की मुहर लगाई है।
- चड्ढा ने साफ किया कि अब उनका गुट प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही देश के विकास के लिए काम करेगा। इस दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को भी धन्यवाद दिया, हालांकि उनके तेवर पूरी तरह से बगावती नजर आए।
आम आदमी पार्टी के लिए आगे क्या?
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सांसद थे, जिनमें से 7 का एक साथ इस्तीफा देना पार्टी के लिए एक अस्तित्व के संकट (Existential Crisis) जैसा है। दलबदल कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए दो-तिहाई (2/3) बहुमत का आंकड़ा जरूरी होता है, और इन सांसदों ने ठीक 7 (जो कि 10 का दो-तिहाई से अधिक है) की संख्या में इस्तीफा दिया है, जिससे कानूनी रूप से यह विभाजन (Split) माना जा सकता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या अरविंद केजरीवाल इस झटके से अपनी पार्टी को उबार पाएंगे? या दिल्ली की राजनीति में यह किसी नए अध्याय की शुरुआत है?



