
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Election 2026) का संग्राम अपने सबसे अहम और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इस चुनावी माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का हालिया मंदिर दौरा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) द्वारा अनुसूचित जाति (SC) समाज को लेकर की गई 1 टिप्पणी ने बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 2 बड़ी घटनाओं का सीधा असर आने वाले चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है।
पीएम मोदी का मंदिर दौरा और मास्टरस्ट्रोक
भारतीय जनता पार्टी बंगाल में अपने हिंदू वोट बैंक और विशेषकर दलित एवं मतुआ (Matua) समुदाय को साधने की पूरी कोशिश कर रही है।
- चुनाव प्रचार के बीच पीएम मोदी का एक प्रमुख मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करना महज़ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
- इस दौरे के जरिए पीएम मोदी ने सीधे तौर पर उन लाखों एससी और मतुआ मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की है, जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने के बाद से बीजेपी के कोर वोटर माने जाते हैं।
- मोदी का यह कदम बंगाली अस्मिता और धार्मिक भावनाओं को बीजेपी के पक्ष में लामबंद करने की एक गहरी रणनीति का हिस्सा है।
ममता बनर्जी की टिप्पणी से मचा सियासी बवाल
एक तरफ जहां बीजेपी एससी समाज को अपने करीब ला रही है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी के एक कथित बयान ने टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
- हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान ममता बनर्जी ने एससी समुदाय (विशेषकर मतुआ और नामशूद्र समाज) के वोटिंग पैटर्न को लेकर एक टिप्पणी की थी, जिसे बीजेपी ने ‘दलितों का अपमान’ करार दिया है।
- बीजेपी नेता लगातार इस मुद्दे को उछाल रहे हैं और रैलियों में जनता से पूछ रहे हैं कि क्या वे टीएमसी के इस अपमान का जवाब वोट से नहीं देंगे?
- हालांकि, टीएमसी ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि ममता बनर्जी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और वे हमेशा से पिछड़े वर्गों के हक की लड़ाई लड़ती आई हैं।
चुनाव नतीजों पर क्या होगा इसका सीधा असर?
पश्चिम बंगाल में लगभग 68 से 70 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां एससी (SC) समुदाय के मतदाता हार-जीत का सीधा फैसला करते हैं।
- साल 2021 के चुनावों में भी इन सीटों पर जबरदस्त टक्कर देखने को मिली थी। अब 2026 में, पीएम मोदी के मंदिर दर्शन से उपजी सहानुभूति और ममता बनर्जी के बयान से उपजा विवाद, इन 70 सीटों का समीकरण पूरी तरह से बदल सकता है।
- अगर एससी समाज का बड़ा हिस्सा इस विवाद के चलते बीजेपी के पक्ष में ध्रुवीकृत (Polarize) हो जाता है, तो ममता बनर्जी के लिए तीसरी बार लगातार सत्ता में वापसी करना एक बेहद कठिन चुनौती साबित होगा।
चुनाव आयोग जल्द ही नतीजों की घोषणा करेगा, लेकिन उससे पहले राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि बंगाल में इस बार एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।



