Bilaspur Snake Bite Scam: बिलासपुर में 17 करोड़ 24 लाख का सर्पदंश मुआवजा घोटाला: डॉक्टर के बाद एसडीएम दफ्तर के तीन क्लर्क गिरफ्तार

बिलासपुर जिले में 17 करोड़ 24 लाख रुपये के फर्जी सर्पदंश (Snakebite) मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सिम्स (CIMS) की तत्कालीन महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी की गिरफ्तारी के बाद, अब एसडीएम और तहसील कार्यालय के तीन क्लर्कों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इन कर्मचारियों पर फर्जी प्रकरण तैयार कर शासन से मुआवजा राशि स्वीकृत कराने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है।
मुख्य बिंदु:
- घोटाले की कुल रकम: 17 करोड़ 24 लाख रुपये।
- नई गिरफ्तारियां: सरकंडा पुलिस ने एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब राम बिंझवार, तथा तहसील कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को गिरफ्तार किया है।
- मुख्य मास्टरमाइंड: तहसील से संबद्ध ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा (गिरफ्तार) इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक है।
- फरार आरोपी: मुख्य आरोपी वकील श्रवण वस्त्रकार और सिम्स के एक अन्य डॉक्टर (डॉ. गोले) फिलहाल फरार हैं।
- दर्ज मामले: एसएसपी रजनेश सिंह की निगरानी में अब तक 17 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
घोटाले का तरीका (Modus Operandi) पुलिस जांच के अनुसार, इस घोटाले के पीछे एक पूरा संगठित गिरोह सक्रिय था:
- परिजनों से संपर्क: किसी की मौत होने पर गिरोह के सदस्य परिजनों से संपर्क कर उन्हें सिर्फ ‘सर्पदंश से मौत’ कहने को राजी करते थे।
- फर्जी पोस्टमॉर्टम और फाइलें: डॉक्टर फर्जी रिपोर्ट बनाते थे और सरकारी बाबू अपनी लॉगिन आईडी से फर्जी फाइलें तैयार कर मुआवजा प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे।
- फर्जी खाते: गिरोह में शामिल बैंककर्मी फर्जी अकाउंट खोलते थे, जिनमें शासन से जारी मुआवजा राशि जमा होती थी।
- रकम का बंटवारा: क्लेम करने वाले परिवार को सिर्फ 50 हजार रुपये दिए जाते थे, बाकी का पूरा पैसा गिरोह के सदस्य (वकील, क्लर्क, डॉक्टर और बैंककर्मी) आपस में बांट लेते थे।
जांच और आगे की कार्रवाई यह पूरा मामला बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया था। जांच में सामने आया है कि साल 2019 से लेकर 2023 तक के पांच वर्षों में सर्पदंश से मौत के कई संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
जिले में ऐसे करीब 15 संदिग्ध प्रकरण चिन्हित किए गए हैं। इन मामलों में रिपोर्ट देने वाले कई डॉक्टरों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां की जाएंगी।
पहला मामला बिल्हा से आया था सामने सर्पदंश से मौत की गलत जानकारी देकर मुआवजा लेने का पहला मामला बिल्हा से सामने आया था। वहां मृत्यु जहर खाने से हुई थी, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कारण सर्पदंश बताया गया था। इसी मामले में डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक अधिवक्ता को सबसे पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।






