CG TET News: छत्तीसगढ़ के 80 हजार शिक्षकों की नौकरी पर आया बड़ा संकट

छत्तीसगढ़ के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में काम कर रहे हजारों शिक्षकों के सामने अचानक एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है. (CG TET News) सुप्रीम कोर्ट के एक सख्त आदेश के बाद प्रदेश के करीब 80 हजार 491 शिक्षक अब शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के दायरे में आ गए हैं. CG TET News से जुड़ी यह सबसे बड़ी खबर है क्योंकि अगर इन शिक्षकों ने तय समय सीमा के भीतर यह परीक्षा पास नहीं की तो उनकी बरसों पुरानी नौकरी भी जा सकती है.
किन शिक्षकों पर मंडरा रहा है खतरा, CG TET News
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित वह शिक्षक वर्ग है जिनकी नियुक्ति तीन सितंबर दो हजार एक से तेईस अगस्त दो हजार दस के बीच हुई थी. अदालत ने इन सभी शिक्षकों को राहत देने से इंकार करते हुए इकतीस अगस्त दो हजार अट्ठाईस तक टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वर्ष दो हजार दस से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को किसी भी कीमत पर टीईटी से छूट नहीं मिलेगी और इस संबंध में दायर पुनर्विचार याचिका भी पहले ही खारिज हो चुकी है.
पचास साल के शिक्षकों की बढ़ी चिंता
CG TET News को लेकर शिक्षकों में सबसे बड़ी चिंता उनकी उम्र को लेकर है. टीईटी के दायरे में आने वाले अधिकांश शिक्षक अब पचास वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके हैं. कई शिक्षकों की उम्र तो चौवन से पचपन वर्ष तक पहुंच चुकी है. शिक्षकों का कहना है कि बरसों तक स्कूलों में अपनी सेवाएं देने के बाद अब बुढ़ापे में उन्हें स्कूली छात्रों की तरह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है जो कि उनके लिए बहुत ही मुश्किल साबित हो रहा है.
किस जिले में हैं सबसे ज्यादा शिक्षक
पूरे प्रदेश में टीईटी के दायरे में आने वाले शिक्षकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा दबाव कोंडागांव जिले पर है. कोंडागांव में पांच हजार तीन सौ चौंतीस शिक्षक इस दायरे में आते हैं. इसके बाद बलौदाबाजार भाटापारा में चार हजार पांच सौ पैंतीस महासमुंद में चार हजार चार सौ छियासी सरगुजा में चार हजार तीन सौ अट्ठाईस और रायगढ़ में चार हजार दो सौ सात शिक्षकों को यह परीक्षा पास करनी होगी. वहीं सबसे कम शिक्षकों का आंकड़ा मुंगेली और राजधानी रायपुर का है.
शिक्षक संगठनों ने उठाई बड़ी मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि टीईटी नियमित रूप से आयोजित नहीं होती है जिसके कारण शिक्षकों को परीक्षा पास करने के सीमित अवसर मिलते हैं. उन्होंने मांग की है कि सरकार को मिशन मोड में हर तीन या चार महीने में टीईटी का आयोजन करना चाहिए. छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने यह भी मांग उठाई है कि इतने बरसों का अनुभव रखने वाले सेवाकालीन शिक्षकों के लिए एक अलग विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया जाए. अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है.






