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Nakti Village Dispute Congress: नकटी गांव विवाद में आर-पार के मूड में कांग्रेस, पीड़ितों के लिए लड़ेगी कानूनी लड़ाई; बनेगी 5 सदस्यीय टीम

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे नकटी गांव में मकान तोड़े जाने (Nakti Village Dispute Congress) और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा अब प्रदेश स्तर की राजनीति के केंद्र में आ गया है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (CPCC) द्वारा गठित जांच समिति ने रविवार को अपनी तीसरी अहम बैठक की। इस बैठक में सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कांग्रेस ने अब इस पूरे मामले में सड़क से लेकर अदालत तक कानूनी लड़ाई लड़ने की रणनीति तैयार कर ली है।

सरकार पर उदासीनता का आरोप: दीपक बैज, Nakti Village Dispute Congress

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बैठक को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार नकटी के प्रभावित परिवारों के प्रति पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है।

  • खुले आसमान के नीचे जीवन: बैज ने चिंता जताते हुए कहा कि एक महीना बीत जाने के बाद भी पुनर्वास और न्याय को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।
  • प्रशासनिक नाकामी: इस भारी बरसात के मौसम में प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, जो यह साबित करता है कि प्रशासन की तरफ से राहत के कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।

कानूनी लड़ाई के लिए बनेगी 5 सदस्यीय टीम

प्रभावित परिवारों को उनका हक दिलाने के लिए कांग्रेस ने अब इस मामले को अदालत तक ले जाने का फैसला किया है। (Nakti Village Dispute Congress) इसके लिए पार्टी के विधि विभाग की एक पांच सदस्यीय टीम का गठन किया जाएगा। यह लीगल टीम न्यायालयीन लड़ाई की पूरी रणनीति तैयार करेगी और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच कर उनका पक्ष मजबूती से रखेगी।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें, Nakti Village Dispute Congress

बैठक में सरकार के सामने कुछ स्पष्ट और कड़ी मांगें रखी गईं:

  1. उसी स्थान पर पुनर्वास: प्रभावित परिवारों का उसी स्थान पर सम्मानजनक तरीके से पुनर्वास किया जाए और उन्हें पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएं।
  2. राजस्व ऑडिट सार्वजनिक हो: तोड़फोड़ वाली जगह और उसके आसपास की भूमि का राजस्व ऑडिट (Revenue Audit) कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  3. प्रभावशाली लोगों का खुलासा: कांग्रेस का आरोप है कि ऑडिट से यह साफ हो जाएगा कि किन प्रभावशाली लोगों के निजी हितों को साधने के लिए गरीबों के आशियाने उजाड़े गए।

“यह मामला सामाजिक न्याय से जुड़ा है”

जांच समिति के संयोजक और पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने बैठक में स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल एक जगह से विस्थापन और पुनर्वास तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। समिति इस पूरे मामले को व्यापक नजरिए से देख रही है, ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके।

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल हुए और अपनी राय रखी:

  • पूर्व मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया
  • रायपुर ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे
  • रायपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन
  • पूर्व विधायक विकास उपाध्याय
  • सुशील आनंद शुक्ला, पंकज शर्मा, भावेश बघेल और आशीष वर्मा

कांग्रेस की 5 सदस्यीय विधि टीम अब कानूनी मोर्चा संभालेगी। (Nakti Village Dispute Congress) इसके साथ ही, राजनीतिक स्तर पर भी सरकार पर दबाव बनाने का काम जारी रहेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार कांग्रेस के इस आक्रामक रुख और पीड़ितों के पुनर्वास के मुद्दे पर आने वाले दिनों में क्या कदम उठाती है।

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