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Fake Mangalsutra Controversy: “7 हजार में कैसे आता असली गहना?”, नकली मंगलसूत्र विवाद पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का बड़ा बयान

Fake Mangalsutra Controversy: छत्तीसगढ़ में ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत नवविवाहित जोड़ों को बांटे गए नकली मंगलसूत्र के मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बढ़ती महंगाई और सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों के कारण असली गहने देना संभव नहीं था।

7 हजार के बजट में असली गहना संभव नहीं

मंत्री राजवाड़े ने बताया कि योजना के नियमों के अनुसार उपहार सामग्री पर केवल 7 हजार रुपए ही खर्च किए जा सकते हैं। इसी सीमित राशि में कपड़े, श्रृंगार सामग्री, बिछिया और पायल जैसे अन्य जरूरी सामान भी देने होते हैं। ऐसे में चांदी की असली चेन या सोने का मंगलसूत्र देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था, इसलिए आर्टिफिशियल (गिलट) चेन दी गई।

प्रति जोड़ा 50 हजार का पैकेज: ऐसे होता है खर्च

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक जोड़े पर कुल 50,000 रुपए का बजट निर्धारित है:

  • 8,000 रुपए: भोजन, टेंट और आयोजन की व्यवस्था पर।
  • 7,000 रुपए: कपड़े, श्रृंगार सामग्री और उपहार के लिए।
  • 36,000 रुपए: यह सबसे बड़ी राशि सीधे दुल्हन के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है (पहले यह राशि 35 हजार रुपए थी)।

सिस्टम में बदलाव और कमीशनखोरी पर रोक

मंत्री ने दावा किया कि पहले उपहारों की खरीद में कमीशनखोरी और गड़बड़ी की शिकायतें आती थीं। इसे रोकने के लिए ही सरकार ने DBT व्यवस्था लागू की है, ताकि सीधे नकद राशि लाभार्थी के खाते में जाए और दुल्हन अपनी पसंद के असली गहने खुद खरीद सके। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है।

कैसे खुली पोल और क्या थे आरोप?

पूरा विवाद 10 फरवरी को हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम से जुड़ा है:

  • सामूहिक विवाह: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड गांव में 184 जोड़ों का विवाह हुआ था।
  • मंगलसूत्र पड़ा काला: कुछ महीनों बाद कई दुल्हनों के मंगलसूत्र काले पड़ने लगे। स्थानीय ज्वेलर से जांच कराने पर पता चला कि यह गहने सोने या चांदी के नहीं, बल्कि ‘गिलट’ के बने थे।
  • वसूली के गंभीर आरोप: मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब कुछ दुल्हनों ने आरोप लगाया कि मंगलसूत्र और सामग्री के नाम पर उनसे 15-15 हजार रुपए वसूले गए। हालांकि, बाद में कलेक्टर स्तर की जांच में विभागीय अधिकारियों को निर्दोष पाया गया।

अभी भी बाकी हैं ये सवाल

भले ही मंत्री ने महंगाई का हवाला देकर आर्टिफिशियल चेन देने को सही ठहराया है, लेकिन कई सवाल अब भी खड़े हैं:

  1. अगर गहने नकली (आर्टिफिशियल) थे, तो लाभार्थियों को इसकी जानकारी विवाह के समय ही क्यों नहीं दी गई?
  2. क्या उपहार सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कोई स्पष्ट मानक तय नहीं हैं?
  3. क्या गरीब बेटियों को सम्मान के नाम पर केवल प्रतीकात्मक गिफ्ट देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी मान सकती है?

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