Chhattisgarh Rice Procurement 2026: सेंट्रल पूल के लिए 73 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की तैयारी

रायपुर। खरीफ विपणन सीजन 2026-27 में (Chhattisgarh Rice Procurement 2026) छत्तीसगढ़ की धान खरीदी और चावल जमा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार सेंट्रल पूल के लिए छत्तीसगढ़ से 73 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की तैयारी में है। यह जानकारी नई दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सचिवों की बैठक के बाद सामने आई है। बैठक में खाद्यान्न खरीद, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, भंडारण और चावल की गुणवत्ता से जुड़े नए मानकों पर चर्चा हुई।
दिल्ली में खाद्य सचिवों की बैठक में क्या तय हुआ?
भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा की अध्यक्षता में 1 सितंबर को नई दिल्ली में बैठक आयोजित हुई थी। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सचिवों के साथ भारतीय खाद्य निगम यानी FCI के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में आगामी खरीफ विपणन सीजन के लिए धान खरीदी का राष्ट्रीय अनुमान 708.64 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। दूसरे स्वतंत्र कृषि उद्योग स्रोत ने भी बैठक, राष्ट्रीय अनुमान और नए गुणवत्ता मानकों की पुष्टि की है।
छत्तीसगढ़ के लिए 73 लाख मीट्रिक टन चावल का आंकड़ा राज्य की धान आधारित कृषि अर्थव्यवस्था के लिहाज से अहम है, क्योंकि प्रदेश में सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बड़ी संख्या में किसानों की आय से सीधे जुड़ी है।
अब चावल की गुणवत्ता पर ज्यादा सख्ती
नई व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार PMGKAY और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में Improved Rice यानी बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की व्यवस्था लागू की जाएगी।
कच्चे चावल में टूटे दानों की अनुमत सीमा वर्तमान 25 प्रतिशत से घटाकर अधिकतम 10 प्रतिशत करने की तैयारी है। वहीं पारबॉयल्ड चावल के लिए टूटे दानों की सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत होगी। नई खरीद व्यवस्था खरीफ विपणन सीजन 2026-27 से शुरू होगी और वितरण स्तर पर बदलाव 1 जनवरी 2027 से लागू किए जाने की जानकारी दी गई है।
मिलरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण होगा बदलाव?
गुणवत्ता मानक कड़े होने का सीधा असर धान की मिलिंग प्रक्रिया पर पड़ेगा। यदि टूटे चावल का प्रतिशत कम रखना है तो मिलों को मशीनों की गुणवत्ता, सुखाई, धान की नमी और प्रोसेसिंग नियंत्रण पर अधिक ध्यान देना होगा।
इसी कारण राज्यों को अपनी मौजूदा मिलिंग क्षमता का आकलन करने और जरूरी तकनीकी उन्नयन की योजना बनाने के लिए कहा गया है। चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का उद्देश्य यह है कि नए मानकों के कारण खरीद या चावल जमा प्रक्रिया बाधित न हो।
छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में राइस मिलें सरकारी धान की मिलिंग से जुड़ी हैं, इसलिए गुणवत्ता मानकों में बदलाव का असर प्रशासन और मिलरों दोनों की तैयारी पर पड़ेगा।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
केंद्र द्वारा सेंट्रल पूल के लिए 73 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की तैयारी का सीधा संबंध राज्य में खरीदे जाने वाले धान की मिलिंग से है। यदि निर्धारित मात्रा में चावल सेंट्रल पूल में स्वीकार होता है तो राज्य की खरीद व्यवस्था और भंडारण प्रबंधन को सुविधा मिलती है।
हालांकि धान खरीद का वास्तविक संचालन किसानों के पंजीयन, खरीदी केंद्रों की संख्या, प्रति किसान सीमा, समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा घोषित खरीद नीति के अनुसार होगा। इसलिए 73 लाख मीट्रिक टन चावल के आंकड़े को सीधे उतनी ही मात्रा की धान खरीदी मान लेना सही नहीं होगा।
मोटे अनाज पर भी चर्चा
बैठक केवल चावल तक सीमित नहीं थी। मोटे अनाज, बाजरा और छोटे मिलेट्स की खरीद व वितरण की भी समीक्षा हुई। 2025-26 में 16.38 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज और बाजरा खरीदे जाने की जानकारी दी गई, जिसे पिछले पांच वर्षों का सबसे अधिक स्तर बताया गया है।
अब राज्य की तैयारी पर नजर
अगला महत्वपूर्ण चरण छत्तीसगढ़ में धान खरीद की विस्तृत नीति, मिलिंग क्षमता और केंद्रीय पूल में चावल जमा करने की कार्ययोजना होगा। गुणवत्ता मानक बदलने के कारण खरीदी से लेकर मिलिंग और भंडारण तक पूरी व्यवस्था को पहले से तैयार करना होगा।






