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Gangrel Dam Water Level: गंगरेल 97.16% भरा, 7 गेट खुले; महानदी किनारे गांवों में अलर्ट

धमतरी। लगातार बारिश और कैचमेंट क्षेत्र से हो रही पानी की आवक के कारण गंगरेल बांध का जलस्तर (Gangrel Dam Water Level) तेजी से बढ़ा है। बांध 97.16 प्रतिशत भर चुका है। पानी का स्तर नियंत्रित रखने के लिए सात गेट खोले गए हैं और बड़ी मात्रा में पानी बाहर छोड़ा जा रहा है। महानदी किनारे बसे गांवों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

40 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी की आवक

गंगरेल जलाशय में कैचमेंट क्षेत्र से करीब 40 हजार 390 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है। वहीं जलाशय से करीब 42 हजार 540 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है।

इनफ्लो और आउटफ्लो की मात्रा बारिश के आधार पर लगातार बदल सकती है। जलाशय लगभग पूरी क्षमता के करीब पहुंच चुका है, इसलिए बांध प्रबंधन पानी के स्तर पर लगातार नजर रख रहा है।

महानदी में छोड़ा जा रहा पानी

गंगरेल से छोड़ा गया पानी आगे महानदी में पहुंच रहा है। इसका असर नदी के जलस्तर पर दिखाई दे सकता है।

नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को पानी के करीब नहीं जाने की सलाह दी गई है। मछली पकड़ने, पशुओं को नदी पार कराने या नदी के बीच बने टापुओं तक जाने से बचने को कहा गया है।

बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नीचे के इलाकों में जलस्तर अचानक बढ़ सकता है।

जलाशय का भरना अच्छी खबर भी

गंगरेल छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण जलाशयों में शामिल है। इसका पानी सिंचाई, पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए उपयोग किया जाता है।

मानसून में पर्याप्त जलभराव होने से आने वाले महीनों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर रहती है।

हालांकि बांध जब अपनी अधिकतम क्षमता के करीब पहुंचता है, तब अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से निकालना जरूरी हो जाता है।

गांवों में क्यों जारी किया जाता है अलर्ट

बांध से पानी छोड़ते समय नदी का स्तर बढ़ने में कुछ समय लग सकता है। कई बार लोग नदी के शांत दिखाई देने पर उसमें उतर जाते हैं और बाद में पानी अचानक बढ़ जाता है।

इसी जोखिम को देखते हुए डाउनस्ट्रीम गांवों में पहले से सूचना दी जाती है।

नदी किनारे के खेत, पशु चराने वाले क्षेत्र और अस्थायी रास्ते भी पानी बढ़ने से प्रभावित हो सकते हैं।

लगातार बारिश बढ़ा रही दबाव

धमतरी जिले के जलाशयों में इस समय लगातार पानी पहुंच रहा है। यदि कैचमेंट क्षेत्र में भारी बारिश होती है तो बांध में आवक और बढ़ सकती है।

इस स्थिति में गेटों की संख्या या छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है।

इसलिए एक समय का डिस्चार्ज आंकड़ा पूरे दिन समान रहेगा, यह जरूरी नहीं है।

पर्यटकों को भी सावधानी की जरूरत

गंगरेल बांध और आसपास का क्षेत्र पर्यटन के लिए लोकप्रिय है। बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में लोग बांध और जलाशय देखने पहुंचते हैं।

गेट खोले जाने और तेज बहाव के समय प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाना खतरनाक हो सकता है।

सेल्फी या वीडियो के लिए बैरिकेड पार करना गंभीर हादसे की वजह बन सकता है।

प्रशासन की अपील पर ध्यान जरूरी

महानदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ताजा सूचना सबसे महत्वपूर्ण है।

सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और पुराने डिस्चार्ज आंकड़े अक्सर दोबारा शेयर होते हैं। इसलिए नदी के जलस्तर को लेकर किसी वायरल संदेश के बजाय अधिकृत सूचना पर भरोसा करना चाहिए।

गंगरेल का 97 प्रतिशत से अधिक भराव आने वाले दिनों में बांध प्रबंधन के लिए लगातार निगरानी का विषय रहेगा।

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